

रांची: केंद्र सरकार द्वारा संसद से पारित खान और खनिज (विकास एवं नियमन) संशोधन विधेयक 2026 के कारण झारखंड सरकार को भारी वित्तीय राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। राज्य के खान एवं भूतत्व विभाग के आकलन के अनुसार वर्ष 2029-30 तक (अगले तीन वर्षों में) राज्य को करीब 47,600 करोड़ का वित्तीय नुकसान होगा।





सेस वसूली पर रोक
वित्तीय वर्ष 2026-27 में माइनिंग कंपनियों से 13,000 करोड़ सेस वसूलने का लक्ष्य था (जिसमें से अप्रैल-जुलाई तक ₹4,400 करोड़ वसूले जा चुके हैं)। नए कानून लागू होने के बाद अब राज्य सरकार यह राशि नहीं वसूल पाएगी। यदि पिछले जीएसटी नुकसान और नए खनन कानून दोनों को मिला दिया जाए तो वर्ष 2025-26 से 2029-30 के दौरान राज्य का कुल संभावित नुकसान 1.23 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।
राज्य सरकार और सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन ने इस कानून का कड़ा विरोध करते हुए इसे राज्य के कर वसूलने के अधिकारों पर सीधा हमला बताया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि इससे ‘मंईयां सम्मान’ और ‘अबुआ आवास’ जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। दूसरी ओर कोयला और खान मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि खनन से अर्जित होने वाले प्रत्येक 1 में से 90 पैसे राज्यों के पास ही रहेंगे और संशोधनों के बाद भी राज्यों की आमदनी पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।
