CJI पर टिप्पणी संविधान और न्यायपालिका पर साजिश: आलोक दूबे

News Aroma
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Jharkhand News: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने गोड्डा से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे द्वारा सुप्रीम कोर्ट और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना के खिलाफ दी गई विवादित टिप्पणी की कड़ी निंदा की है। आलोक दूबे ने इसे न केवल सुप्रीम कोर्ट की गरिमा पर हमला, बल्कि भारतीय लोकतंत्र, संविधान, और समाज की एकता को कमजोर करने की “गहरी साजिश” करार दिया।

आलोक दूबे ने कहा, “निशिकांत दुबे का बयान सुप्रीम कोर्ट और CJI पर व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि देश की न्यायपालिका और संवैधानिक ढांचे पर सुनियोजित प्रहार है। BJP के नेता बार-बार भड़काऊ बयान देकर समाज में हिंसा, नफरत, और बंटवारा फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। यह वही प्रवृत्ति है, जिसके खिलाफ नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चेतावनी दी थी कि BJP संवैधानिक संस्थाओं की नींव को खोखला कर रही है।”

आलोक दूबे का तीखा हमला

आलोक दूबे ने कहा कि निशिकांत जैसे बयान जनता में सुप्रीम कोर्ट और संविधान के प्रति अविश्वास पैदा कर सकते हैं, जो देश की एकता और अखंडता के लिए खतरनाक है। उन्होंने चेतावनी दी, “BJP जो रास्ता दिखा रही है, अगर देश उस पर चल पड़ा, तो अमन-चैन और भाईचारा हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट देश का सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान है, और इसे निशाना बनाना लोकतंत्र के खिलाफ साजिश है।”

उन्होंने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा कि अनुच्छेद 124 और 129 के तहत सुप्रीम कोर्ट को पूर्ण स्वतंत्रता और अधिकार प्राप्त हैं ताकि वह असंवैधानिक कानूनों को खारिज कर सके और संविधान की रक्षा कर सके। आलोक दूबे ने कहा, “किसी सरकार या पार्टी को यह हक नहीं कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को दबाए या नियंत्रित करे। BJP का यह रवैया संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर के सपनों पर हमला है।”

BJP के दूरी बनाने पर सवाल

आलोक दूबे ने BJP अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के उस बयान को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने निशिकांत के बयान को उनकी “व्यक्तिगत राय” बताकर पार्टी को इससे अलग किया था। दूबे ने कहा, “अगर BJP वाकई इन बयानों से सहमत नहीं है, तो निशिकांत दुबे से तत्काल इस्तीफा लेकर अपनी नीयत स्पष्ट करे। यह नाटक जनता को गुमराह करने के लिए है। BJP के नेता बार-बार संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और समाज में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।”
उन्होंने मांग की कि निशिकांत दुबे को संसद सदस्यता से तत्काल बर्खास्त किया जाए और उनके खिलाफ कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट एक्ट, 1971 की धारा 15(1)(b) के तहत आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू हो। आलोक दूबे ने सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की।

निशिकांत दुबे ने एक प्रेस वार्ता में सुप्रीम कोर्ट पर “धार्मिक युद्ध भड़काने” और “अपनी सीमा से बाहर जाने” का आरोप लगाया। उन्होंने CJI संजीव खन्ना को “देश में गृह युद्ध” के लिए जिम्मेदार ठहराया और सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसलों, जैसे वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की सुनवाई और राष्ट्रपति को विधेयकों पर तीन महीने में निर्णय लेने के निर्देश पर सवाल उठाए। दुबे ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को रद्द कर रहा है और यह संविधान के अनुच्छेद 368 का उल्लंघन है।

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