दो सीटों पर सियासी संग्राम: झारखंड राज्यसभा चुनाव में गठबंधन की एकजुटता और विधायकों की वफादारी होगी परीक्षा

झारखंड राज्यसभा चुनाव में दो सीटों को लेकर सियासी संग्राम तेज हो गया है, जहां गठबंधन की एकजुटता, विधायकों की वफादारी और संभावित क्रॉस वोटिंग सबसे बड़ी परीक्षा बनने वाली है।

Razi Ahmad
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Jharkhand Rajya Sabha Election 2026 : झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। नामांकन की अंतिम तिथि नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 18 जून को होने वाले मतदान और मतगणना से पहले सभी दल अपने-अपने राजनीतिक समीकरण साधने में जुटे हुए हैं।

इस चुनाव का सबसे रोचक पहलू सत्ता पक्ष के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर चली खींचतान रही। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने पहले ही बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार घोषित कर दिया है, जबकि दूसरी सीट को लेकर कांग्रेस और झामुमो के बीच लंबे समय तक मंथन चलता रहा। हालांकि अब दोनों दलों के बीच एक-एक सीट पर चुनाव लड़ने को लेकर सहमति बनने की खबरें सामने आ रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा में संख्या बल के आधार पर महागठबंधन दोनों सीटें जीतने की स्थिति में है। झामुमो, कांग्रेस, राजद और सहयोगी दलों को मिलाकर ‘इंडिया’ गठबंधन के पास पर्याप्त विधायक हैं। इसके बावजूद चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग और अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाक्रमों का इतिहास रहा है।

विपक्षी एनडीए भी अपनी रणनीति पर काम कर रहा है। भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास सीमित संख्या बल होने के बावजूद राजनीतिक संदेश देने और अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की चुनौती है। ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कोई निर्दलीय या तीसरा उम्मीदवार चुनावी मुकाबले को और रोचक बनाएगा।

चुनावी प्रक्रिया के अनुसार 8 जून नामांकन की अंतिम तिथि है, 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी, 11 जून तक नाम वापस लिए जा सकेंगे और 18 जून को मतदान के साथ मतगणना भी होगी।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि केवल दो प्रमुख उम्मीदवार ही मैदान में रहते हैं तो मुकाबला अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। लेकिन किसी अतिरिक्त उम्मीदवार के उतरने की स्थिति में विधायकों के समर्थन, प्रस्तावकों की संख्या और संभावित क्रॉस वोटिंग जैसे मुद्दे चुनाव को रोमांचक बना सकते हैं।

अब सभी की निगाहें नामांकन के अंतिम दिन पर टिकी हैं। इसी के बाद स्पष्ट होगा कि राज्यसभा चुनाव महज औपचारिक प्रक्रिया रहेगा या फिर झारखंड की राजनीति में कोई नया समीकरण उभरकर सामने आएगा।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।