झारखंड राज्यसभा चुनाव में सियासी घमासान तेज! क्रॉस वोटिंग और ‘4 वोट’ का खेल बना बड़ा ट्विस्ट

झारखंड राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग और दल-बदल की चर्चाएं तेज हैं। हेमंत सोरेन मजबूत स्थिति में हैं, लेकिन दूसरी सीट को लेकर महागठबंधन और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला है।

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रांची: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। दल-बदल, क्रॉस वोटिंग और विधायकों को अनुपस्थित कराने जैसे राजनीतिक दांव-पेंच की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि झामुमो के नेतृत्व वाले गठबंधन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन फिलहाल मजबूत स्थिति में दिख रहे हैं और अपने परिवार के किसी सदस्य को राज्यसभा भेजने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, लेकिन दोनों सीटें महागठबंधन के खाते में जाएंगी या नहीं, इस पर संशय बना हुआ है।

राजनीतिक बयानबाजी से बढ़ा तनाव

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि पार्टी सिर्फ संख्या बल पर निर्भर नहीं रहेगी और पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी। भाजपा के पास फिलहाल 24 विधायक हैं और उसे जीत के लिए कम से कम 4 अतिरिक्त वोटों की जरूरत है। पार्टी अंतरात्मा की आवाज के आधार पर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।

इधर कांग्रेस की सक्रियता तब बढ़ी जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और झारखंड प्रभारी के राजू, तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि उम्मीदवारों पर फैसला दिल्ली आलाकमान से बातचीत के बाद ही होगा।

झारखंड विधानसभा का गणित

81 सदस्यीय विधानसभा में इस समय सियासी समीकरण काफी अहम हो गए हैं।महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जिनमें झामुमो-34, कांग्रेस-16, राजद-4, भाकपा माले-2 है। वहीं एनडीए के पास कुल 24 विधायक हैं, जिनमें भाजपा-21, आजसू-1, जदयू- 1, लोजपा (आर)-1 एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 28 वोटों की जरूरत होगी।

कांग्रेस की रणनीति

कांग्रेस अगर दूसरी सीट पर दावा मजबूत करती है तो उसे झामुमो के समर्थन के साथ-साथ राजद और भाकपा माले के विधायकों के वोट की भी जरूरत होगी। गणित के हिसाब से झामुमो अपने हिस्से की एक सीट लगभग सुनिश्चित मान रहा है, लेकिन दूसरी सीट के लिए गठबंधन के भीतर संतुलन बनाना चुनौती है।

समझिए भाजपा का फॉर्मूला और संभावित खेल

भाजपा इस चुनाव में बिहार मॉडल की तर्ज पर रणनीति बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का लक्ष्य चार अतिरिक्त वोट जुटाकर समीकरण बदलना है। इसके लिए राजद के कुछ विधायकों और एक निर्दलीय या अन्य विधायक के समर्थन की संभावना पर नजर रखी जा रही है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ संख्या का खेल नहीं है, बल्कि क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक समीकरण ही अंतिम नतीजा तय करेंगे।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।