JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते बोले- निष्पक्ष जांच के लिए दिया इस्तीफा, किसी दबाव में नहीं लिया फैसला

JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते ने कहा कि उन्होंने CID जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इस्तीफा दिया। उन्होंने किसी दबाव से इनकार करते हुए जांच में सहयोग का भरोसा दिया।

Razi Ahmad
3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

JPSC Former Chairman : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते ने अपने इस्तीफे को लेकर पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी दबाव में नहीं, बल्कि आयोग से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पद छोड़ा है।

उनका कहना है कि सीआईडी जांच शुरू होने के बाद उन्हें लगा कि जांच एजेंसी को पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, इसलिए उन्होंने स्वयं इस्तीफा देने का फैसला किया।

मीडिया से बातचीत में एल खियांग्ते ने कहा कि उन पर किसी तरह का राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव नहीं था। उन्होंने कहा कि वह जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करेंगे ताकि मामले की सच्चाई सामने आ सके।

ब्लैकलिस्टेड एजेंसी पर दी सफाई

पूर्व अध्यक्ष ने ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को परीक्षा का जिम्मा दिए जाने के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि किसी भी एजेंसी को काम देने से पहले उसकी पात्रता, संसाधनों और रिकॉर्ड की जांच की जाती है। उनके अनुसार, कोई भी जानबूझकर ब्लैकलिस्टेड एजेंसी के साथ काम नहीं करना चाहेगा।

OMR शीट विवाद पर क्या बोले?

14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा की OMR शीट को लेकर उठे विवाद पर एल खियांग्ते ने कहा कि आयोग के नियमों के तहत अभ्यर्थियों को परीक्षा के बाद OMR शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराई जाती है। सोशल मीडिया पर वायरल OMR शीट की सत्यता की पुष्टि संबंधित परीक्षा एजेंसी ही जांच के बाद कर सकती है। आयोग ने इस संबंध में आवश्यक जानकारी एजेंसी को उपलब्ध करा दी है।

स्क्रूटनी और कटऑफ पर भी दी जानकारी

पीटी परीक्षा परिणाम में आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि JPSC के नियमों में स्क्रूटनी के दौरान सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य नहीं हैं। उन्होंने बताया कि आयोग के सदस्य अंतिम मेरिट सूची, स्क्रूटनी और साक्षात्कार जैसे महत्वपूर्ण चरणों में अपनी भूमिका निभाते हैं।

कटऑफ अंक जारी नहीं करने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम के साथ कटऑफ प्रकाशित करना अनिवार्य प्रावधान नहीं है। अंतिम परिणाम जारी होने के समय कटऑफ और आरक्षण से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।

पारदर्शिता बढ़ाने का किया दावा

एल खियांग्ते ने कहा कि अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में कई पहल की थीं। उनका मानना है कि परीक्षा की गोपनीय जानकारी को छोड़कर अधिकतम सूचनाएं सार्वजनिक होनी चाहिए।

सोशल मीडिया पर पद बेचने जैसे आरोपों पर उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी किसी गतिविधि की जानकारी नहीं है। यदि इस तरह के आरोप सामने आए हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

Share This Article
रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।