रांची : करमा पूजा की पूर्व संध्या पर केंद्रीय सरना समिति की ओर से रांची में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इसमें पर्व की पवित्रता और पारंपरिक मर्यादा बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान समिति के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने कहा कि आदिवासी समाज मूल रूप से प्रकृति पूजक है और कर्म पूजा उनकी सदियों पुरानी पारंपरिक धार्मिक आस्था व संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं और आम लोगों से अपील की कि वे पूजा-अर्चना के दौरान झाड़-फूंक जैसी अंधविश्वासी गतिविधियों से पूरी तरह दूर रहें और अपनी समृद्ध रूढ़िवादी परंपराओं व रीति-रिवाजों का पालन करते हुए ही इस पर्व को मनाएं।
फूलचंद तिर्की ने ईसाई धर्म अपना चुके आदिवासी समुदाय के लोगों से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि वे गिरजाघरों के भीतर कर्म की डाली न गाड़ें, क्योंकि ऐसा करने से आदिवासी समाज की मूल धार्मिक परंपराओं और कर्म देवता का अपमान होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म परिवर्तन कर चुके आदिवासी भाई-बहनों का पारंपरिक अखाड़े में करमा पूजा मनाने के लिए हमेशा स्वागत है, लेकिन गिरजाघरों के अंदर इस पूजा का आयोजन करने से परहेज किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी से अपनी मूल सांस्कृतिक जड़ों का सम्मान करते हुए पारंपरिक तरीके से पर्व मनाने की अपील की।


