


लातेहार (महुआडांड़): कागजों पर भारत 79 साल से आजाद है। लेकिन लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड के सोहर पंचायत स्थित बेलवार गांव के लिए आजादी का मतलब आज भी सिर्फ एक तारीख है। प्रखंड मुख्यालय से महज 14 KM दूर बसे इस गांव तक पहुंचने का रास्ता सीधा मौत को न्योता देता है। गांव जाने के लिए एक ही नदी को दो बार पार करना पड़ता है। लेकिन हैरानी की बात है कि आज तक यहां एक पुल नहीं बना।बारिश आते ही बेलवार ‘जेल’ बन जाता है नदी में उफान आया नहीं कि संपर्क कटा। एंबुलेंस का तो सवाल ही नहीं। बीमार को बचाना है तो चारपाई पर लादकर या कंधे पर उठाकर तेज बहाव वाली नदी पार करनी पड़ती है। कई बार देरी से मरीज दम तोड़ देते हैं। यहां पीने के पानी का हाल और भी बुरा है। न सरकारी नल, न चापाकल। ग्रामीण नदी की रेत खोदकर गड्ढा बनाते हैं, फिर उसमें से गंदा पानी निकालकर पीते हैं। इसी पानी से खाना बनता है, बच्चे बीमार पड़ते हैं।





