


पुष्यमित्र





माही नदी पर बने तटबंधों के कई जगह से टूटने के कारण सारण जिले के सात प्रखंडों के 109 गांवों में भीषण बाढ़ आई है और इस बाढ़ से 2.33 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। यह सरकार का आंकड़ा है। यह बिहार में साल 2026 की सबसे बड़ी बाढ़ है, जिसमें एक ही जिले के लगभग 2.5 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। मगर आप जब पता करेंगे कि यह माही कौन सी नदी है, जिसमें इतनी बाढ़ आ गई तो हैरत में पड़ जायेंगे। यह गंडक नदी की सहायक धारा है, जो आम दिनों में कई बार किसी चौड़े नहर का आभास देती है। अब आप यह सोचिये कि इस माही नदी में इतना पानी कैसे आ गया कि उसने 109 गांवों को डुबा दिया।
अब जरा इसकी कहानी विस्तार से समझिये। गंडक नदी में एक सामानांतर चैनल बना है, गोपालगंज के हीरापाकड़ से शुरू होता है और सारण जिले के हासिलपुर में गंगा में मिल जाता है। गंडक की मूल धारा से अलग यह लगभग 170 किमी लंबी धारा है। जिसे कहीं अकाली नाला(छाड़ी) कहते हैं, तो कहीं गंडकी, आखिर में इसे माही कहने लगते हैं। अमूमन इस धारा में उतना पानी नहीं होता था।
2023 में गंडक नदी से बाढ़ का प्रेशर कम करने के लिए बिहार सरकार ने इस पुराने चैनल की उड़ाही और नदी जोड़ो परियोजना की शुरुआत की। करीब ₹69.89 करोड़ की इस परियोजना का मूल उद्देश्य गंडक के अतिरिक्त पानी को छाड़ी, गंडकी और माही के रास्ते गंगा तक पहुंचाना था। इस सिस्टम की जलनिकासी क्षमता बढ़ाकर गोपालगंज, सीवान और सारण के करीब 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र से जलजमाव और बाढ़ के पानी की निकासी बेहतर करना था। इस प्रस्तावित चैनल की चौड़ाई करीब 19 मीटर और औसत गहराई तीन मीटर बतायी गयी थी।
अब इस चैनल की याद आपको दूसरे तरीके से कराते हैं। जब इस चैनल की उड़ाही शुरू हुई तो 2024 में इसके रास्ते के छह पुल अचानक एक-एक करके गिर गये। आपको याद होगा तब पुलों के गिरने से बड़ा बवाल हुआ था और नेशनल न्यूज बना था। वे इसी धारा के पुल थे। तब मैं सारण और सीवान जिले के बीच गिरे इन पुलों को देखने वहां गया था। तब समझ आया कि उड़ाही की वजह से पुल के नीव हिल गये, इसलिए ये पुल गिर गये। तब समझ आया था कि बिना आकलन किये योजना को लागू करने का यही अंजाम होता है।
अब दो साल बाद इस रूट में यह नई मुसीबत आई है। इस पुराने चैनल में जिसका काम शायद अभी तक पूरा नहीं हुआ है, इसकी क्षमता से अधिक पानी आ गया है। जिसका खामियाजा सारण जिले के 2.33 लाख लोग भुगत रहे हैं। मेरे हिसाब से तो यह सामान्य बाढ़ नहीं है।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।
