


हजारीबाग : सन 1857 की क्रांति में अंग्रेजी हुकूमत के छक्के छुड़ा देनेवाले शहीद जयमंगल पांडेय का खपरैल का घर गिरने के कगार पर है हजारीबाग शहर के खीरगांव मुहल्ले में स्थित यह मिट्टी का घर सदियों पुराना है। यहीं से निकलकर जयमंगल पांडेय ने 1857 में अंग्रेजों को पानी पिला दिया था। यही नहीं बैटल ऑफ चतरा की कहानी यहीं लिखी गई थी। खीरगांव का यह घर सिर्फ मिट्टी का एक ढांचा नहीं, बल्कि उस रणनीति और वीरता का गवाह है जिसने छोटानागपुर क्षेत्र में क्रांति की अलख जगाई। 2 अक्टूबर 1857 को हुई चतरा की लड़ाई झारखंड के स्वतंत्रता इतिहास की सबसे भीषण और निर्णायक लड़ाइयों में से एक मानी जाती है। सूबेदार जयमंगल पांडेय और नादिर अली खान के नेतृत्व में बागियों ने ब्रिटिश सेना (मेजर इंग्लिश के नेतृत्व में) का डटकर मुकाबला किया था। इस ऐतिहासिक संघर्ष के बाद अंग्रेजों ने जयमंगल पांडेय और नादिर अली खान को गिरफ्तार कर लिया और 4 अक्टूबर 1857 को चतरा के फांसीहारी तालाब के पास एक आम के पेड़ पर सरेआम फांसी दे दी।






