जमशेदपुर: करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से बने सात मंजिला महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में शनिवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अस्पताल की एक लिफ्ट अचानक बीच रास्ते में बंद हो गई। लिफ्ट में करीब 20 से 25 लोग सवार थे, जो लगभग आधे घंटे तक अंदर ही फंसे रहे।

जानकारी के मुताबिक, शनिवार दोपहर लिफ्ट ऊपर की ओर जा रही थी। इसी दौरान अचानक वह बीच में रुक गई। लिफ्ट के अंदर मौजूद लोगों ने मदद के लिए आवाज लगाई, लेकिन काफी देर तक कोई सहायता नहीं पहुंची। लंबे समय तक अंदर फंसे रहने के कारण लोगों में घबराहट और बेचैनी का माहौल बन गया।
घटना की जानकारी मिलने के बाद तकनीशियनों को मौके पर बुलाया गया। करीब 20 मिनट की मशक्कत के बाद लिफ्ट को खोला जा सका और उसमें फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत की बात रही कि इस दौरान किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
इमरजेंसी चाबी तक नहीं मिली
घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि लिफ्ट को आपात स्थिति में खोलने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली चाबी होमगार्ड जवानों के पास रखी जाती है। लेकिन जब लिफ्ट में लोग फंसे, उस समय इमरजेंसी चाबी तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकी।
इसके बाद तकनीशियन के पास मौजूद पुरानी चाबी की मदद से लिफ्ट खोली गई और लोगों को बाहर निकाला गया। सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने सात मंजिला अस्पताल में अगर लिफ्ट बीच रास्ते में बंद हो जाए, तो आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी इंतजाम तत्काल उपलब्ध क्यों नहीं थे?
अस्पताल में आने वाले मरीज और उनके परिजन पहले से ही कई तरह की समस्याओं का सामना करते हैं। ऐसे में लिफ्ट जैसी जरूरी सुविधा का अचानक बंद हो जाना और इमरजेंसी चाबी का समय पर नहीं मिलना अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।


