बोकारो स्टील प्लांट संकट : डीसी अजय नाथ झा की सूझबूझ और पहल से खुला प्लांट का मुख्य गेट, टला बड़ा औद्योगिक संकट

बोकारो डीसी अजय नाथ झा की सूझबूझ और मैराथन वार्ताओं के बाद बोकारो स्टील प्लांट का मुख्य गेट खुल गया है, जिससे बड़ा औद्योगिक संकट टल गया है।

Razi Ahmad
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बोकारो : बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) में विस्थापित अप्रेंटिस संघ और अन्य संगठनों के आंदोलन के कारण पिछले कई दिनों से उपजा गंभीर संकट और गतिरोध आखिरकार बोकारो डीसी अजय नाथ झा की सूझबूझ, कड़े प्रशासनिक रुख और लगातार चली वार्ता के बाद समाप्त हो गया है। डीसी अजय नाथ झा की व्यक्तिगत और प्रभावी पहल के चलते फिलहाल संयंत्र का मुख्य गेट खुल गया हैं, जिससे प्लांट के अंदर फंसे अधिकारियों और कर्मचारियों की सांसें में सांस आई है। संयंत्र में आवागमन सामान्य होने के साथ ही उत्पादन कार्य के भी जल्द पटरी पर लौटने की पूरी उम्मीद बंध गई है।

गैस रिसाव की आशंका और आंतरिक खतरे को भांपते हुए सक्रिय हुआ प्रशासन

बोकारो स्टील प्लांट जैसे भारी उद्योग में ब्लास्ट फर्नेस और कोक ओवन जैसी इकाइयों के भीतर कई तरह की विषैली गैसों (जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड आदि) का निरंतर उत्पादन और संचालन होता है। लंबे समय तक प्लांट के भीतर आवागमन पूरी तरह ठप रहने और आवश्यक तकनीकी देखरेख बाधित होने से किसी भी वक्त कोई बहुत बड़ी तकनीकी दुर्घटना या विषैली गैस के रिसाव जैसी भयंकर आपदा की आशंका बनी हुई थी। बेहद संवेदनशील और गंभीर खतरे को गहराई से भांपते हुए डीसी अजय नाथ झा ने मामले को अत्यंत प्राथमिकता दी। उन्होंने पिछले 24 घंटों से अधिक समय से घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए रखी। संकट को टालने के लिए खुद मोर्चा संभाला।

कई दौर की मैराथन वार्ता और सख्त प्रशासनिक कदम

विस्थापित संगठनों द्वारा प्लांट के सभी द्वारों को जाम करने और अधिकारियों को अंदर ही रोक लेने के कारण लॉ एंड ऑर्डर (विधि-व्यवस्था) की स्थिति पूरी तरह चरमरा गई थी। इस असहज स्थिति से निपटने के लिए डीसी अजय नाथ झा के निर्देश पर चास के अनुमंडल दण्डाधिकारी प्रांजल ढांडा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत एक कड़ा आदेश जारी किया।

इसके तहत बोकारो इस्पात संयंत्र के मुख्य द्वार के 200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई। प्रशासन ने साफ कर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का पूरा अधिकार है और कोई भी संगठन ‘टू टैंक’ के समीप शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख सकता है, लेकिन संयंत्र के द्वारों को बाधित करना और औद्योगिक शांति बिगाड़ना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रशासनिक सख्ती और डीसी अजय नाथ झा द्वारा बुलाई गई कई दौर की मैराथन वार्ताओं का असर रंग लाया। डीसी ने विस्थापित प्रतिनिधियों और प्लांट प्रबंधन दोनों पक्षों के साथ संवाद स्थापित कर सभी पक्षों की चिंताओं को सुना और व्यावहारिक समाधान निकाला।

प्लांट में आवागमन शुरू, सामान्य हुई गतिविधियां

डीसी अजय नाथ झा की सूझबूझ भरे कदमों के बाद चास अनुमंडल प्रशासन और प्रतिनियुक्त दण्डाधिकारियों और पुलिस बलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए मुख्य द्वार पर आवागमन को पूरी तरह से सुचारू करवा दिया। प्लांट के अंदर फंसे अधिकारी और कर्मचारी अब सुरक्षित बाहर आ रहे हैं. संयंत्र के भीतर कच्चे माल व अन्य आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति बहाल हो गई है।

बोकारो स्टील प्लांट में शांति और व्यवस्था पूरी तरह बहाल

बोकारो स्टील ऑफिसर्स एसोसिएशन सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने इस संकट की घड़ी में डीसी अजय नाथ झा द्वारा दिखाई गई प्रशासनिक दक्षता, संवेदनशीलता और त्वरित नेतृत्व की जमकर सराहना की है। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते डीसी अजय नाथ झा ने व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित नहीं किया होता, तो यह आंदोलन किसी बड़ी औद्योगिक दुर्घटना या मानवीय संकट का रूप ले सकता था।

फिलहाल, जिला प्रशासन की मुस्तैदी और डीसी अजय नाथ झा के कुशल मार्गदर्शन से ‘मिनी इंडिया’ कहे जाने वाले बोकारो स्टील प्लांट में शांति और व्यवस्था पूरी तरह बहाल हो चुकी है, जिससे पूरे औद्योगिक शहर ने राहत की सांस ली है. बोकारो वासियों ने इसके लिए डीसी बोकारो अजय नाथ झा के प्रति आभार प्रकट किया है।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।