
Jharkhand MGNREGA Workers Protest : झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के बैनर तले राजधानी रांची में चल रहा राज्यस्तरीय महाधरना दूसरे दिन भी जारी रहा। राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में पहुंचे मनरेगा कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो 17 जून से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।
धरना स्थल पर विशेष रूप से संताल परगना सहित विभिन्न प्रमंडलों से आए कर्मचारियों ने एकजुटता का परिचय देते हुए सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्षों से वे अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। इससे कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि मनरेगा कर्मियों की प्रमुख मांगों में ग्रेड-पे आधारित वेतनमान लागू करना, सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करना, स्थायी समायोजन करना तथा दिवंगत कर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देना शामिल है। उनका कहना है कि ग्रामीण विकास योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में मनरेगा कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें उचित वेतन और भविष्य की सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
आंदोलनरत कर्मचारियों ने कहा कि 25 मई 2026 को विभागीय अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में कई मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई थी। उस समय उम्मीद जगी थी कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान निकालेगी, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। कर्मचारियों का आरोप है कि लगातार टालमटोल की नीति अपनाई जा रही है, जिससे उनमें निराशा बढ़ रही है।
संघ ने आंदोलन को और तेज करने की रणनीति भी घोषित की है। पदाधिकारियों के अनुसार यदि सरकार ने जल्द पहल नहीं की तो 17 जून से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। इसके अलावा 19 जून को राजभवन से जयपाल सिंह स्टेडियम तक मानव श्रृंखला बनाकर अपनी मांगों के समर्थन में व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।
मनरेगा कर्मचारी संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपने अधिकारों, सम्मानजनक वेतन और भविष्य की सुरक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

