झारखंड में मनरेगा की चाल, साल की शुरुआत में ज्यादा काम, बाद में आई गिरावट

Archana Ekka
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MNREGA’s Progress in Jharkhand: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MNREGA) के तहत झारखंड में चालू वित्त वर्ष 2025–26 के काम की मांग से जुड़े आंकड़े सामने आए हैं।

सरकारी MIS रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष की शुरुआत में ग्रामीण इलाकों में काम की मांग काफी ज्यादा रही, लेकिन मानसून और सर्दियों के महीनों में इसमें गिरावट देखी गई।

अप्रैल–मई में सबसे ज्यादा रही मांग

रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल और मई 2025 में मनरेगा के तहत काम मांगने वाले परिवारों की संख्या सबसे अधिक थी। मई महीने में यह आंकड़ा 13 लाख से भी ज्यादा पहुंच गया।

यह साफ दिखाता है कि गर्मियों के शुरुआती महीनों में ग्रामीण परिवारों के लिए MNREGA Employment का बड़ा सहारा बना।

जून से शुरू हुई गिरावट

जून और जुलाई से काम की मांग में धीरे-धीरे कमी आने लगी। अगस्त और सितंबर में यह और भी कम हो गई।

हालांकि, नवंबर और दिसंबर में थोड़ी राहत देखने को मिली, जब वर्क डिमांड में आंशिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। लेकिन जनवरी आते-आते एक बार फिर मांग घट गई।

क्यों बदलती रहती है काम की मांग

विशेषज्ञों का कहना है कि मनरेगा में काम की मांग सीधे तौर पर खेती, मानसून और गांवों में उपलब्ध अन्य रोजगार पर निर्भर करती है।

बारिश और खेती के मौसम में मजदूर खेतों में काम करने लगते हैं, जिससे मनरेगा पर निर्भरता कुछ कम हो जाती है। वहीं खेती के पहले और बाद के समय में मनरेगा की मांग बढ़ जाती है।

इन जिलों में ज्यादा जरूरत

जिलावार आंकड़ों को देखें तो गढ़वा, गिरिडीह, पलामू, रांची और पूर्वी सिंहभूम जैसे जिलों में लगातार ज्यादा वर्क डिमांड दर्ज की गई। इसके उलट लोहरदगा, खूंटी और सिमडेगा जैसे जिलों में मांग अपेक्षाकृत कम रही।

जानकारों के अनुसार, जहां ग्रामीण आबादी ज्यादा है और रोजगार के सीमित विकल्प हैं, वहां मनरेगा आज भी अहम भूमिका निभा रही है।

पंचायत स्तर पर बढ़े काम: मांग

ग्रामीण संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की है कि जिन महीनों में काम की मांग ज्यादा रहती है, उन समय पंचायत स्तर पर ज्यादा योजनाएं शुरू की जाएं।

इससे मजदूरों को समय पर रोजगार मिलेगा और बेरोजगारी भत्ता देने की जरूरत भी कम होगी।

हर महीने की वर्क डिमांड (परिवारों में)

अप्रैल – 10,96,266
मई – 13,11,548
जून – 12,11,888
जुलाई – 9,22,456
अगस्त – 7,56,299
सितंबर – 7,17,434
अक्टूबर – 6,24,642
नवंबर – 7,13,505
दिसंबर – 8,60,724
जनवरी – 5,94,815

यह आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में MNREGA अभी भी ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार का एक मजबूत आधार है, लेकिन समय के साथ इसकी मांग में उतार-चढ़ाव बना रहता है।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।