रांची: झारखंड, बिहार और ओडिशा बेल्ट का सबसे वांटेड और एक करोड़ रुपये का इनामी माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा एक बार फिर सुरक्षा बलों को चकमा देने में सफल रहा है। करीब 3000 जवानों की घेराबंदी के बावजूद वह सारंडा जंगल से निकलकर कोल्हान के जंगलों में पहुंच गया है। जानकारी के मुताबिक उसके साथ उसका करीबी सहयोगी अजय महतो भी मौजूद है। सुरक्षा एजेंसियों को अब उसकी लोकेशन सारंडा के जराइकेला इलाके से करीब 40 किलोमीटर दूर कोल्हान के जंगलों में मिल रही है। इससे पहले पिछले महीने केंद्रीय सुरक्षा बलों और झारखंड जगुआर की टीम ने मिसिर बेसरा और उसके साथियों को चाईबासा के सारंडा जंगल के जराइकेला, गोइलकेरा और बलिबा इलाके तक सीमित कर दिया था।

बलिबा के आगे घने जंगल और पहाड़ी इलाका होने के कारण वहां लगातार ऑपरेशन चलाना आसान नहीं था। इसी का फायदा उठाकर मिसिर बेसरा और उसके साथी सारंडा-झारखंड-ओडिशा की त्रिकोणीय सीमा के आसपास छोटे-छोटे समूहों में लगातार अपना ठिकाना बदलते रहे। नई सूचना मिलने के बाद अब सुरक्षा बलों ने अभियान का दायरा और बढ़ा दिया है। फिलहाल सारंडा से लेकर दलमा तक बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि नक्सलियों का नया ठिकाना ऊंची पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा हुआ है।
पहले जैसी ताकत नहीं बची
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मिसिर बेसरा भले ही सारंडा जंगल से निकल गया हो, लेकिन अब उसके पास पहले जैसी कैडर शक्ति नहीं बची है। इलाके में उसका प्रभाव भी काफी कमजोर हो चुका है। ऐसे में उसे पहले जैसा सहयोग मिलना मुश्किल माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि उसके सामने अब आत्मसमर्पण के अलावा कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं बचा है। पुलिस के अनुसार जिस इलाके में वह अब तक छिपा था, वहां जगह-जगह विस्फोटक बिछाए गए थे। यही वजह थी कि वहां अभियान चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। हालांकि अब जंगल से बाहर निकलने के बाद उसकी गतिविधियों पर नजर रखना और उसे पकड़ना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
सारंडा से दलमा तक बढ़ा ऑपरेशन
सुरक्षा बलों ने अब ओडिशा सीमा से सटे सारंडा इलाके से लेकर दलमा तक अभियान का दायरा बढ़ा दिया है। कई जिलों की पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल संयुक्त रूप से ऑपरेशन चला रहे हैं। ड्रोन निगरानी और ग्राउंड इंटेलिजेंस की मदद से घेराबंदी और सख्त की जा रही है। पिछले एक महीने से अभियान मुख्य रूप से जराइकेला क्षेत्र के आसपास केंद्रित था, लेकिन अब इसे फिर से विस्तारित किया गया है। झारखंड में नक्सलवाद के पूरी तरह सफाए के उद्देश्य से केंद्र और राज्य सरकार की सुरक्षा एजेंसियां अप्रैल से विशेष अभियान चला रही हैं।
फिलहाल झारखंड में मिसिर बेसरा को सबसे बड़ा सक्रिय नक्सली कमांडर माना जाता है। उसके साथ करीब 50 अन्य नक्सली बताए जा रहे हैं। ये पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम जिलों के ओडिशा सीमा से लगे इलाकों में सक्रिय रहे हैं। पिछले सप्ताह तक सुरक्षा बलों ने इन्हें एक सीमित इलाके में घेर लिया था और खाने-पीने सहित जरूरी सामान की सप्लाई भी काफी हद तक रोक दी थी। इसके बावजूद मिसिर बेसरा किसी तरह घेराबंदी तोड़कर निकलने में सफल रहा।
आखिर कैसे निकल गया मिसिर बेसरा?
नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बल पूरे दस्ते की तलाश कर रहे थे और जंगल में कैंप भी लगाए गए थे। इलाके में लैंड माइंस होने की आशंका के कारण जवान रात के समय बाहर निकलने से बचते थे। इसी स्थिति का फायदा उठाकर नक्सलियों ने अपनी रणनीति बदली। बताया जा रहा है कि सबसे पहले मिसिर बेसरा केवल एक साथी के साथ वहां से निकल गया। इसके बाद उसके बाकी साथी भी छोटे-छोटे समूहों में बंटकर अलग-अलग रास्तों से नए ठिकानों तक पहुंच गए।
तीन हिस्सों में बंट चुका है नक्सली नेटवर्क
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक नक्सली नेटवर्क अब तीन हिस्सों में बंट चुका है। पहले समूह में मिसिर बेसरा का कोर ग्रुप है, जिसमें दो हार्डकोर नक्सली शामिल हैं। अजय महतो भी इसी टीम का हिस्सा है। इस समूह की लोकेशन अब सारंडा के बजाय कोल्हान के जंगलों में बताई जा रही है। दबाव बढ़ने पर मिसिर बेसरा पहले भी दलमा और कोल्हान के इलाकों को सुरक्षित ठिकाने के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। दूसरे समूह में 10 से 15 नक्सली शामिल हैं, जो सारंडा-ओडिशा सीमा के जंगलों में छोटे-छोटे समूहों में रह रहे हैं। तीसरे समूह में करीब नौ नक्सली बताए जा रहे हैं, जिनकी मौजूदगी पोड़ाहाट के जंगलों में होने की सूचना है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि लॉजिस्टिक सप्लाई टूटने, बड़े कैंप ध्वस्त होने और लगातार बढ़ती घेराबंदी के कारण नक्सलियों को बार-बार अपना ठिकाना बदलना पड़ रहा है।
एसपी अमित रेणु ने क्या कहा?
एसपी अमित रेणु ने बताया कि अब नक्सली गिनती के ही बचे हैं। ऑपरेशन का दायरा बढ़ा दिया गया है। सारंडा से बाहर गोइलकेरा तक पहले भी अभियान चलाया जा रहा था। अब कोल्हान के सानुआ इलाके में भी घेराबंदी कर ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में नक्सलियों की मुश्किलें और बढ़ेंगी। उनके पास आत्मसमर्पण के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।
बेटे की अपील भी नहीं मानी, सरेंडर से किया इनकार
एक करोड़ रुपये का इनामी और माओवादी का शीर्ष नेता मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर ने झारखंड पुलिस के सामने सरेंडर करने से इनकार कर दिया है। पुलिस के मुताबिक परिवार और बेटे के जरिए की गई भावनात्मक अपील का भी उस पर कोई असर नहीं पड़ा। जानकारी के अनुसार झारखंड पुलिस ने उसके बेटे के माध्यम से संपर्क साधा था। बेटे ने बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए मुख्यधारा में लौटने की अपील की थी, लेकिन मिसिर बेसरा ने साफ कह दिया कि वह हथियार नहीं डालेगा। गिरिडीह जिले के पीरटांड़ का रहने वाला मिसिर बेसरा 1980 और 1990 के दशक में एमसीसी से जुड़ा था। बाद में वह संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया। वर्ष 2007 में उसकी गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन 2009 में चाईबासा कोर्ट ले जाते समय नक्सलियों ने विस्फोट कर उसे पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया था। तब से वह लगातार सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।


