दहेज के लिए पत्नी को जिंदा जलाने के मामले में मुजफ्फरनगर की अदालत ने सुनाई मौत की सजा

मुजफ्फरनगर की अदालत ने दहेज के लिए पत्नी शहजादी को जिंदा जलाकर मारने के मामले में नदीम को मौत की सजा सुनाई, चार महीने में 23वां मृत्युदंड।

Razi Ahmad
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मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की एक त्वरित अदालत ने दहेज की मांग को लेकर 2018 में अपनी पत्नी को जिंदा जलाकर मारने के मामले में एक व्यक्ति को सोमवार को मौत की सजा सुनाई। इसके साथ ही पिछले चार महीनों में इस अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजाओं की संख्या बढ़कर 23 हो गई है।

सरकारी अधिवक्ता कुलदीप कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने आरोपी नदीम को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 302 और 504 के तहत दोषी ठहराते हुए उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

उन्होंने बताया कि यह मामला आठ साल पुराना है। इसमें नदीम पर आरोप था कि उसने 23 जुलाई 2018 को मुजफ्फरनगर जिले के शाहपुर कस्बे में दहेज की मांग को लेकर अपनी पत्नी शहजादी (23) को आग लगा दी थी।

कुमार ने बताया कि गंभीर रूप से झुलसी शहजादी को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था, जहां बाद में उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि मौत से पहले शहजादी का बयान दर्ज किया गया था, जिसमें उसने कथित रूप से अपने पति पर आग लगाने का आरोप लगाया था।

सरकारी अधिवक्ता के अनुसार, मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के सभी 11 गवाह अपने बयान से मुकर गए, लेकिन अदालत ने शहजादी के मृत्यु पूर्व बयान के आधार पर नदीम को दोषी ठहराया।

पुलिस ने 23 नवंबर 2018 को नदीम, उसकी मां शमशिदा और बहन सोनी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। कुमार ने बताया कि साक्ष्यों के अभाव में सोनी को बरी कर दिया गया, जबकि मुकदमे की सुनवाई के दौरान शमशिदा की मृत्यु हो गई।

उन्होंने बताया कि शहजादी और नदीम का विवाह 10 जनवरी 2015 को हुआ था।

सरकारी अधिवक्ता के मुताबिक, सोमवार के फैसले के बाद न्यायाधीश दिवाकर की अदालत ने पिछले चार महीनों में 11 अलग-अलग मामलों में 23 लोगों को मौत की सजा सुनाई है।

इससे पहले, अगस्त में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर की अदालत में लंबित करीब 100 हत्या के मामलों को प्रशासनिक आदेश के तहत जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था।

कुलदीप कुमार ने बताया था कि मौत की सजा या उम्रकैद से जुड़े अपराधों वाले इन मामलों को दिवाकर की अध्यक्षता वाली फास्ट ट्रैक अदालत से जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिंह की अदालत में भेजा गया है।

जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने बताया था कि यह स्थानांतरण वकीलों और वादकारियों के बीच अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने की आशंकाओं के बीच किया गया था।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।