आंदोलन के अलावा किसानों के पास कोई विकल्प नहीं: अतुल अंजान

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नई दिल्ली: तीन कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलनरत किसान ने कल 200वां दिन पूरा किया लेकिन अभी तक समाधान पर सहमति नहीं बन पाई है।

केन्द्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वो कानून वापस नहीं लेंगे संशोधन पर विचार कर सकते हैं। वहीं किसानों ने भी डटे रहने का संकेत दिया है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के वरिष्ठ नेता अतुल अंजान ने मंगलवार को इस मुद्दे पर बातचीत करते हुए कहा कि आंदोलनरत किसान तब तक अपने घरों को वापस नहीं जाएंगे जब तक उनकी बात मान नहीं ली जाती।

अनजान ने कहा कि किसान का उसके खेत से आध्यात्मिक, पारिवारिक और वंशानुगत संबंध रहा है।

सरकार ये तीनों कृषि कानूनों को लाकर किसान और उसका खेत से जो संबंध है उसे खत्म करना चाहती है। जिसे किसान किसी हालत में होने नहीं देंगे।

उन्होंने कहा कि किसान संगठनों ने साफ कर दिया है कि उनकी मांगों को जब तक मान नहीं लिया जाता वो घर वापस नहीं जाएंगे।

ऐसे में ये सरकार को तय करनी है कि वो किसानों की बात मानेंगे या नहीं। अनजान ने कहा कि सरकार के इस रवैये से देश का किसान नाराज है।

उन्होंने कहा कि अगर केन्द्र सरकार किसानों की बात नहीं मानती है तो भाजपा को इसका परिणाम आगामी विधानसभा चुनाओं मे भुगतना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश में भाजपा को जिला पंचायत सदस्य के चुनाओं में हार का सामना करना पड़ा है उससे पता चलता है कि किसान भाजपा से कितने नाराज हैं।

अनजान ने कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों का केन्द्र सरकार पर दबाव है। इसी कारण सरकार किसान विरोधी फैसले ले रही है। लेकिन किसान अपने खेत को बिकने नहीं देंगे। वो आंदोलन जारी रखेंगे।

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