ISRO ने लगातार तीसरी बार किया RLV का सफल लैंडिंग एक्सपेरिमेंट

Digital Desk

ISRO RLV Landing : एक बार फिर इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गनाइजेशन (ISRO) ने कमाल कर दिया है। रविवार को भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने RLV पुष्पक की सफल लैंडिंग (Successful Landing) की है।

ISRO ने रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल (RLV) की लगातार तीसरी बार लैंडिंग एक्सपेरिमेंट में कामयाबी हासिल की है। इससे पहले 22 मार्च को ISRO ने इसकी दूसरी सफल लैंडिग की थी।

रविवार को लैडिंग के बाद ISRO ने कहा कि लैंडिंग के लिए काफी मुश्किल परिस्थितियां पैदा की गई थीं, लेकिन, चुनौतीपूर्ण परिस्थियों में तेज हवाओं के बीच ऑटोमैटिक लैंडिंग (Automatic Landing) कराई गई।

लैंडिंग की रफ्तार 320 KM प्रति घंटे से अधिक

जानकारी के अनुसार, ISRO की तरफ से RLV पुष्पक विमान का परीक्षण सुबह 7.10 बजे बेंगलुरु (Bengaluru) से लगभग 220 KM दूर चित्रदुर्ग जिले के चल्लाकेरे में एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज (ATR) में किया गया था।

विमान को भारतीय वायुसेना के चिनूक हेलिकॉप्टर से 4.5 किमी की ऊंचाई तक ले जाया गया और रनवे पर लैंडिंग के लिए छोड़ा गया।

ISRO ने कहा, “कम लिफ्ट-टू-ड्रैग अनुपात के कारण लैंडिंग की रफ्तार 320 किमी प्रति घंटे से अधिक थी।

इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक कमर्शियल विमान की लैंडिंग रफ्तार 260 KM प्रति घंटे रहती है, जबकि एक लड़ाकू विमान की लैंडिंग रफ्तार 280 किमी प्रति घंटे रहती है।”

RLV परियोजना के बारे में जानें

ISRO की RLV परियोजना एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। यह अंतरिक्ष में मानव की निरंतर उपस्थिति की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेगा।

भारत की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए यह मिशन बेहद जरूरी है। RLV-LEX-03 का उद्देश्य वाहन के प्रदर्शन, मार्गदर्शन और लैंडिंग क्षमताओं में सुधार करना है।

RLV को विकसित करने वाले विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) के निदेशक एस उन्नीकृष्णन नायर ने कहा कि दूसरी लैंडिंग की तुलना में, RLV-LEX3 अधिक चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि LEX-02 के दौरान लगभग 150 मीटर की तुलना में इस बार इसका परीक्षण 500 मीटर के साथ किया गया।

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