

रांची : हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत में प्रत्येक वर्ष 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। यह दिन महान हॉकी खिलाड़ी एवं भारत के खेल गौरव मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि देने तथा देश में खेल, फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है।





राष्ट्रीय खेल दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि खेलों को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने और नई पीढ़ी को खेल प्रतिभा के विकास के लिए प्रेरित करने का राष्ट्रीय अवसर है।
मेजर ध्यानचंद को उनकेअसाधारण खेल कौशल के कारण ‘हॉकी के जादूगर’ के रूप में जाना जाता है।
वर्ष 1926 से 1948 तक के अपने शानदार खेल जीवन में उन्होंने 1,000 से अधिक गोल किए और भारत को 1928, 1932 तथा 1936 के ओलंपिक खेलों में लगातार तीन स्वर्ण पदक दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका जीवन अनुशासन, कठिन परिश्रम, समर्पण और देशभक्ति का प्रेरणादायी उदाहरण है।
राष्ट्रीय खेल दिवस का प्रमुख उद्देश्य देशवासियों, विशेषकर बच्चों और युवाओं को खेलों एवं शारीरिक गतिविधियों के प्रति प्रेरित करना है। खेल केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का प्रभावी साधन भी हैं। मैदान व्यक्ति को अनुशासन, समय का महत्व, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता, संघर्ष करने का साहस और हार से सीख लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। इसलिए खेलों से जुड़ा समाज अधिक स्वस्थ, सक्रिय और आत्मविश्वासी बन सकता है।
इस दिन देशभर के विद्यालयों, महाविद्यालयों,विश्वविद्यालयों, खेल संस्थानों और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा खेल प्रतियोगिताएं,दौड़,योग, फिटनेस कार्यक्रम, जागरूकता अभियान तथा अन्य गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।
राष्ट्रीय खेल दिवस के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि खेल केवल पदक जीतने वाले खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि हर नागरिक को अपनी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधियों को स्थान देना चाहिए। सरकार भी खेल और फिटनेस को जनभागीदारी का आंदोलन बनाने पर जोर देती रही है। राष्ट्रीय खेल दिवस का एक महत्वपूर्ण पक्ष खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का सम्मान भी है।
इस अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों और खेलों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रशिक्षकों को राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों के माध्यम से सम्मानित किया जाता है।
ऐसे सम्मान प्रतिभाओं का उत्साह बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं को खेलों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं।आज के डिजिटल युग में बच्चों और युवाओं का लंबे समय तक मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य स्क्रीन से जुड़े रहना चिंता का विषय है।
ऐसे समय में राष्ट्रीय खेल दिवस का महत्व और बढ़ जाता है। नियमित खेल और व्यायाम शारीरिक सक्रियता के साथ मानसिक प्रसन्नता, एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायक होते हैं।राष्ट्रीय खेल दिवस हमें यह संदेश देता है कि स्वस्थ नागरिक ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला होते हैं।
आवश्यकता है कि प्रत्येक परिवार बच्चों को खेल के मैदान तक पहुंचाए, विद्यालय खेलों को शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएं और समाज उभरती प्रतिभाओं को प्रोत्साहन दे। मेजर ध्यानचंद की विरासत को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि खेलों को केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि स्वस्थ, अनुशासित और श्रेष्ठ जीवन का माध्यम बनाया जाए।
