

RIMS Ranchi : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने रिम्स प्रबंधन को अपनी नियमावली (बायलॉज) खुद बनाने और रोस्टर प्रणाली को पूरी तरह ऑनलाइन करने का निर्देश दिया है। मंगलवार को रांची में रिम्स की समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने यह बात कही।





उन्होंने कहा कि रिम्स एक स्वायत्तशासी संस्था (ऑटोनॉमस बॉडी) है, लेकिन जानकारी के अभाव में प्रबंधन अब तक अपनी नियमावली नहीं बना सका है और सरकार पर निर्भर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वायत्तशासी होने के बावजूद राज्य सरकार से मिलने वाले लाभ रिम्स को मिलते रहेंगे।
डॉक्टरों, प्रोफेसरों और एमबीबीएस पदों पर होने वाली सीधी व बैकलॉग नियुक्तियों के लिए हर कैटेगरी का रोस्टर बनाने का निर्देश दिया गया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने को कहा कि राज्य के 26% जनजातीय (ST) प्रतिनिधित्व के तहत सभी सीटें भरी जाएं। उन्होंने निर्देश दिया कि यदि कोई एसटी अभ्यर्थी सामान्य श्रेणी में चयनित होता है, तो उसे सामान्य में ही गिना जाए ताकि एसटी की आरक्षित सीट खाली न रहे और उसका लाभ दूसरे जनजातीय अभ्यर्थी को मिले।
सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने के लिए ‘लायजन ऑफिसर्स’ को उचित ट्रेनिंग देने और अस्पताल में एक ‘ग्रीवांस रिड्रेसल सेल’ बनाने को कहा गया। इस 10-12 सदस्यीय समिति में एसटी, एससी और एक महिला सदस्य का होना अनिवार्य होगा, ताकि छोटे मामलों का निपटारा यहीं हो सके। रिम्स में छत्तीसगढ़, ओडिशा, बंगाल और पूरे झारखंड से मरीज आते हैं। इसलिए ओपीडी में हिंदी में डिस्प्ले लगाने और समाचार पत्रों में सप्ताह भर के विशेषज्ञ डॉक्टरों का शेड्यूल प्रकाशित करने का निर्देश दिया गया।
नई नर्सों को मरीजों व परिजनों से बेहतर व्यवहार करने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। रिम्स की सुरक्षा व्यवस्था की सराहना करते हुए उन्होंने सुरक्षा गार्डों की ट्रेनिंग को और सुदृढ़ करने की बात कही। रिम्स की आंतरिक समस्याओं और शिकायतों के निपटारे के लिए अब हर तीन महीने में आंतरिक बैठक और हर छह महीने में रिम्स डायरेक्टर के साथ समीक्षा बैठक की जाएगी।
इस बैठक में आयोग के संयुक्त सचिव अमित निर्मल, कानूनी सलाहकार शुभाशीष सोरेन व राहुल यादव, रिम्स के डायरेक्टर, अधीक्षक और चिकित्सा अधीक्षक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
