भविष्य में त्रुटिरहित परीक्षाओं के लिए आंतरिक प्रक्रियाओं, प्रोटोकॉल की समीक्षा की जा रही: एनटीए

यूजीसी-नेट के तीन पेपरों में गड़बड़ी के बाद एनटीए ने पुनर्परीक्षा का फैसला लिया है और भविष्य में निष्पक्ष एवं त्रुटिरहित परीक्षाओं के लिए आंतरिक प्रक्रियाओं की समीक्षा शुरू की।

Razi Ahmad
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नयी दिल्ली: यूजीसी-नेट परीक्षा के तीन पेपरों में हुई गड़बड़ियों को लेकर विपक्षी नेताओं द्वारा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) पर निशाना साधे जाने के बीच एजेंसी के सूत्रों ने कहा कि भविष्य में सभी परीक्षाएं निष्पक्ष और त्रुटिरहित सुनिश्चित करने के लिए आंतरिक प्रक्रियाओं एवं प्रोटोकॉल की समीक्षा की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी ने शिकायतों से जुड़े मामलों की सक्रियता से जांच की और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया। यह कदम अभ्यर्थियों के हित में और एक अधिक जवाबदेह परीक्षा प्रणाली की नींव मज़बूत करने के लिए आवश्यक सुधारों के साथ उठाया गया है।

एनटीए ने रविवार रात यूजीसी-नेट जून 2026 परीक्षा के तीन पेपरों – अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र – के लिए दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की। यह फैसला प्रश्नपत्रों में कई गलतियों की शिकायतों के बाद लिया गया।

अंग्रेज़ी और वाणिज्य विषय की पुनर्परीक्षा 9 सितंबर को होगी, जबकि समाजशास्त्र की परीक्षा इसके अगले दिन आयोजित की जाएगी।

एनटीए ने जूनियर रिसर्च फेलोशिप, सहायक प्रोफेसर पात्रता और पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए 87 विषयों में 22 से 30 जून तक यूजीसी-नेट जून 2026 परीक्षा आयोजित की थी।

इस संबंध में एक सूत्र ने कहा, ‘‘परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी का काम न केवल त्रुटिरहित परीक्षाएँ आयोजित करना है, बल्कि किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर तुरंत और ईमानदारी से कार्रवाई करना भी है।’’

सूत्र ने बताया कि एनटीए ने समस्या को छिपाने के बजाय, यह स्वीकार किया कि इन परीक्षाओं में कुछ गड़बड़ी हुई और अपने खर्च पर सुधारात्मक कदम उठाने की ज़िम्मेदारी ली है।

उन्होंने कहा, ‘‘समस्याओं की पहले से पहचान करने, उन्हें स्वीकार करने और मुश्किल होने पर भी उन पर कार्रवाई करने की इच्छा ही, अधिक जवाबदेह परीक्षा प्रणाली की नींव है।’’

सूत्र ने कहा, ‘‘इतने बड़े पैमाने पर परीक्षाएँ आयोजित करने वाली एजेंसी के सामने कभी-कभी समस्याएँ आ सकती हैं; उसकी विश्वसनीयता इस बात से तय होती है कि वह इन समस्याओं का पता लगाती है, उन्हें स्वीकार करती है और अभ्यर्थियों के हित में उन्हें ठीक करती है।’’

कई विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की है। यह घटनाक्रम पेपर लीक के बाद एनटीए द्वारा नीट-यूजी परीक्षा रद्द कर इसे दोबारा कराए जाने के कुछ महीनों बाद हुआ है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के छात्र संगठन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भी इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन के राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ समझौता नहीं किया जा सकता और एनटीए को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा और मांग की कि एनटीए नेतृत्व को जवाबदेह ठहराया जाए।

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह अब शिक्षा व्यवस्था नहीं रही, बल्कि यह एक वसूली बन गई है।’’

गांधी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा पहला कदम था, आखिरी नहीं। उन्होंने मांग की कि एनटीए नेतृत्व को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।