शाह के प्रस्ताव को किसानों ने ठुकराया, नहीं जाएंगे दिल्ली ; सिंघु और टीकरी बार्डर पर ही जारी रहेगी मोर्चाबंदी

चंडीगढ़: कृषि कानूनों के विरोध में लामबंद किसानों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दिल्ली में बुराड़ी आने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।

किसानों ने दो टूक कहा कि दिल्ली नहीं जाएंगे, यहीं बैठकर लड़ाई लड़ी जाएगी।

दिल्ली कूच को लेकर किसानों की सिंघु व टीकरी बार्डर पर मोर्चेबंदी रविवार को तीसरे दिन भी जारी रही। हरियाणा, पंजाब व राजस्थान से हजारों की संख्या में सिंघु व टीकरी बार्डर पर किसान धरने पर बैठे हुए हैं।

रविवार को किसान संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बुराड़ी आने के प्रस्ताव पर मंथन किया।

दोपहर तक चली लंबी वार्ता में किसानों ने फैसला किया कि वे दिल्ली नहीं जाएंगे और यहीं बैठकर अपनी लड़ाई लड़ेंगे।

किसानों ने केंद्रीय गृह मंत्री के प्रस्ताव को ठुकराते हुए दो टूक कहा कि अब सरकार ने देर कर दी है।

शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों से धरने के लिए निर्धारित बुराड़ी स्थित संत निरंकारी मैदान में पहुंचने की अपील की थी।

उन्होंने कहा था कि निर्धारित स्थल पर पहुंचने के अगले ही दिन वार्ता होगी वहीं, किसानों ने अमित शाह की इस शर्त को ठुकरा दिया है।

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूने कहा कि किसानों का दिल्ली जाने का कोई इरादा नहीं है।

सरकार ने पहले डंडे मारे, फिर पानी की बौछारें और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। अम्बाला से यहां तक उनके पर 30-32 केस दर्ज किए जा चुके हैं। हत्या का केस तक भी किसानों पर दर्ज किया गया है।

चढूनी ने किसानों को आगाह किया कि उन्हें डर है कि जाट आरक्षण की तरह अब कुछ असामाजिक तत्व उनके बीच में न घुस जाएं और कोई अनहोनी न कर दें, इसके लिए किसानों को सतर्क रहना होगा।

अब हरियाणा का किसान हमारा साथ देने के लिए चल पड़ा है। अमित शाह अगर बुराड़ी आकर बात करना चाहते हैं तो भी हम नही मानेंगे। सरकार ने अब देर कर दी।

संयुक्त मोर्चा के बैनर तले आंदोलन चल रहा है। तीनों कानून रद्द हों, बिजली बिल, एमएसपी गारंटी कानून लाया जाए, ये ही किसानों की प्रमुख मांग है।

उधर, किसान आंदोलन पर सियासत थम नहीं रही है। प्रदेश के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने आरोप लगाया कि दिल्ली कूच कर रहे किसान नहीं, कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं और ये पंजाब कांग्रेस का प्रायोजित कार्यक्रम है।

इसके साथ ही उन्होंने पंजाब पर हमेशा से हरियाणा के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया है।

कृषि मंत्री जेपी दलाल ने सबसे पहले हरियाणा और पंजाब के सीएम के बीच बढ़ी तल्खी को लेकर कहा कि पंजाब के सीएम को इतना अहम नहीं करना चाहिए, क्योंकि हरियाणा के सीएम भी जनता के द्वारा चुने हुए हैं।

इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब ने हमेशा से हरियाणा के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया है।

जेपी दलाल ने कहा कि पंजाब तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला तक नहीं मानता और हरियाणा को एसवाईएल का निर्माण नहीं करने देता। जेपी दलाल ने कहा कि पंजाब ने अपने किसानों को बर्बाद करके रख दिया है।

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