
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हिंसा और धांधली के आरोपों के बीच सोमवार को चार निर्वाचन क्षेत्रों में तीसरे चरण का मतदान हुआ।
पुंछ डिवीजन के बाग और हवेली जिलों में मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ, जबकि सात निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिए गए।
कुछ इलाकों में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की खबरें सामने आईं। क्षेत्र के निर्वाचन आयोग ने चार निर्वाचन क्षेत्रों के 803 मतदान केंद्रों में से अधिकांश को ‘संवेदनशील’ या ‘अति संवेदनशील’ घोषित किया था।
निर्वाचन आयोग ने कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंता के कारण तीसरे और अंतिम चरण में पुंछ डिवीजन की सात सीटों पर मतदान स्थगित कर दिया था।
भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश उसके अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। नयी दिल्ली यह भी कहती है कि इन केंद्र शासित प्रदेशों के कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान ने ‘‘अवैध और जबरन कब्जा’’ कर रखा है।
क्षेत्र की तथाकथित विधानसभा के लिए चुनाव के पहले और दूसरे चरण में क्रमशः 27 जुलाई और दो अगस्त को मतदान हुआ था। इन दोनों चरणों में हिंसक प्रदर्शनों और बड़े पैमाने पर धांधली के आरोपों के कारण चुनाव प्रभावित हुए थे।
सरकार समर्थित पीएमएल-एन ने दोनों चरणों में जीत हासिल की और 24 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। केंद्र में उसकी गठबंधन सहयोगी पीपीपी ने कुल 34 सीटों पर हुए चुनाव में 10 सीटें जीतीं। कुल 45 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है।
पीएमएल-एन क्षेत्र में सरकार बनाने की तैयारी में है। पार्टी ने घोषणा की है कि उसके प्रमुख नवाज शरीफ प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार का नाम तय करेंगे।
पीपीपी ने तीसरे चरण में पीएमएल-एन पर बड़े पैमाने पर धांधली करने का आरोप लगाया है।
पीपीपी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि बन्नी मरासिरा इलाके की ओर जाने वाली सड़कों को अवरुद्ध कर दिया गया था और आरोप लगाया कि विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों के कई मतदान केंद्रों पर पीएमएल-एन समर्थक अवैध रूप से मतपत्रों पर मुहर लगा रहे थे।
पीपीपी ने कहा, ‘‘अधिकारी, मतदाता, मतदान एजेंट और पार्टी कार्यकर्ता मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं और यह नहीं देख पा रहे हैं कि अंदर क्या किया जा रहा है।’’
पार्टी ने यह भी कहा कि कुछ मतदान केंद्रों पर मतदानकर्मियों के समय पर नहीं पहुंचने के कारण मतदान समय पर शुरू नहीं हो सका।
उसने यह भी दावा किया कि कुछ मतदान केंद्रों से पीपीपी के मतदान एजेंटों को जबरन बाहर निकाल दिया गया, जहां पीएमएल-एन समर्थक मतपत्रों पर मुहर लगा रहे थे।
पीपीपी ने एक वीडियो भी पोस्ट किया, जिसमें कथित तौर पर पीएमएल-एन कार्यकर्ताओं को एलए-15 सेंट्रल बाग में एक स्कूल में बनाए गए मतदान केंद्र पर हमला करते हुए दिखाया गया है।
चुनाव के पिछले चरण भी हिंसा, धांधली के आरोपों और झड़पों से प्रभावित रहे थे।
पीओके में ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के बैनर तले बड़ी संख्या में लोग जून की शुरुआत से ही प्रदर्शन कर रहे हैं। क्षेत्रीय सरकार ने जून में इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था।
इस समूह की प्रमुख मांग पीओके में विवादित 12 शरणार्थी सीटों को समाप्त करना थी। जेएएसी का आरोप है कि प्रतिष्ठान इन सीटों का इस्तेमाल अपनी पसंद के व्यक्ति को पीओके का तथाकथित प्रधानमंत्री बनाने के लिए करता है। इन प्रदर्शनों के बाद सुरक्षाबलों ने कड़ी कार्रवाई की, जिसमें कई लोग मारे गए।
जेएएसी ने दावा किया है कि जून के पहले सप्ताह से अब तक करीब 400 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं। इसके अलावा उसका दावा है कि 27 जुलाई को हुए पहले चरण के मतदान के दौरान 40 से अधिक लोग मारे गए थे।

