बिहार चुनाव पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट में पहुंची जन सुराज पार्टी

Archana Ekka
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Jan Suraj Party reaches Supreme Court : बिहार चुनाव को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। Jan Suraj Party ने बिहार का चुनाव रद्द कर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग के साथ Supreme Court का दरवाजा खटखटाया है।

पार्टी का आरोप है कि बिहार का चुनाव अवैध तरीकों से जीता गया है।

जन सुराज के नेता जन सुराज ने कहा कि आदर्श आचार संहिता (Ideal Code of Conduct) लागू होने के बावजूद राज्य में खुलेआम नियमों का उल्लंघन किया गया।

महिलाओं को 10 हजार रुपये देने का आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया है कि आचार संहिता लागू रहने के दौरान महिलाओं को सीधे 10,000 रुपये देने का वादा किया गया और इसका प्रचार भी हुआ।

पार्टी का कहना है कि यह सीधा-सीधा मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास है। इसे चुनावी लाभ के लिए किया गया गंभीर उल्लंघन बताया गया है।

संविधान के अनुच्छेदों के उल्लंघन का दावा

जन सुराज पार्टी ने दावा किया है कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 202 और 324 का उल्लंघन है।

पार्टी का कहना है कि निष्पक्ष और समान चुनाव की मूल भावना को ठेस पहुंची है। इसी आधार पर Supreme Court से हस्तक्षेप की मांग की गई है।

महिला रोजगार योजना पर सवाल

याचिका में यह भी कहा गया है कि आचार संहिता लागू रहते हुए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत नए लाभार्थियों को जोड़ा गया और उन्हें भुगतान भी किया गया। पार्टी के अनुसार, यह प्रक्रिया कानून के खिलाफ है और इसे अवैध बताया गया है।

लाखों मतदाताओं पर असर का आरोप

जन सुराज पार्टी का दावा है कि 25 से 35 लाख महिला मतदाताओं को सीधे राशि का हस्तांतरण चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला कदम था।

इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लगभग 1.8 लाख महिलाओं की मतदान केंद्रों पर तैनाती को भी अनुचित और गैरकानूनी बताया गया है।

सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग

पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 (भ्रष्ट आचरण) के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दे। साथ ही, चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की भी अपील की गई है।

पुराने फैसले का हवाला

याचिका में वर्ष 2013 के एक महत्वपूर्ण फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि मुफ्त योजनाओं, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और कल्याणकारी योजनाओं पर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाएं, ताकि चुनाव के समय इनका दुरुपयोग न हो।

समय-सीमा तय करने की मांग

जन सुराज पार्टी ने यह भी मांग की है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से कम से कम छह महीने पहले तक ऐसी योजनाओं के क्रियान्वयन पर न्यूनतम समय-सीमा तय की जाए, जिससे चुनाव पर उनका असर न पड़े।

सुनवाई कब

खबर है कि इस याचिका पर शुक्रवार को Supreme Court की पीठ सुनवाई कर सकती है। अब सबकी नजर अदालत के फैसले पर टिकी है, जो बिहार की राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।