
रांची: रांची नगर निगम ने पुराने जन्म प्रमाणपत्र (ओल्ड बर्थ सर्टिफिकेट) के आवेदनों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। सीआरएस पोर्टल में अचानक किए गए बदलावों के कारण अब आम जनता के साथ-साथ खुद निगम अधिकारियों की परेशानी भी बढ़ गई है। बिना किसी पूर्व सूचना के नियमों में बदलाव होने से पूरी प्रक्रिया ठप हो गई है। सीआरएस पोर्टल में हुए तकनीकी और नीतिगत बदलावों के कारण अब पुराने जन्म प्रमाणपत्र के सत्यापन और नए सिरे से आवेदन की प्रक्रिया बाधित हुई है। इस नए बदलाव के संबंध में संबंधित अधिकारियों को पहले से कोई ट्रेनिंग या सूचना नहीं दी गई थी। इस वजह से वे भी आवेदनों का निपटारा करने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं।
दो दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे
अब आम आवेदकों को पुराने बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने या उसमें सुधार कराने के लिए दो अलग-अलग कार्यालयों की दौड़ लगानी पड़ेगी, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होगा। फिलहाल रांची नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि जब तक पोर्टल के बारे में पूरी जानकारी नहीं मिलती है और नए दिशा-निर्देश स्पष्ट नहीं हो जाते, तब तक पुराने जन्म प्रमाणपत्र से जुड़े नए आवेदनों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। 1 जुलाई से पुराने जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन लिए जाएंगे। वेरिफिकेशन के लिए आवेदन को डीसी ऑफिस और रांची नगर निगम के चक्कर लगाने होंगे।
निगम के सामने ये होगी चुनौती
अधिकारियों के मुताबिक पोर्टल में यह बदलाव तो कर दिया गया है लेकिन सबसे बड़ी चुनौती डाटा वेरिफिकेशन की होगी। चूंकि कुछ सालों पहले तक प्रज्ञा केंद्रों से भी जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जा रहे थे, जिसका रिकॉर्ड रांची नगर निगम के पास नहीं है। ऐसी स्थिति में जब आवेदन लिए जाएंगे तो उसे जिला स्टेटिस्टिक्स ऑफिसर के पास वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाएगा निगम के पास डाटा उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में पुराने बर्थ सर्टिफिकेट का वेरिफिकेशन कर नया सर्टिफिकेट जारी करने में परेशानी आएगी। बता दें कि पहले के बर्थ और डेथ सर्टिफिकेट में क्यूआर कोड नहीं होता था।
इस मामले में रांची नगर निगम की एएमसी सह रजिस्टर निहारिका तिर्की ने बताया कि सीआरएस पोर्टल में अचानक से बदलाव हो गया है। इसके बारे में संबंधित विभाग से तकनीकी जानकारी मांगी गई है और हम लोग इस पूरी प्रक्रिया को समझने का प्रयास कर रहे हैं। 1 जुलाई से फिर से आवेदन लिए जाएंगे। डाटा को लेकर कुछ परेशानियां हो सकती है क्योंकि जो डाटा हमारे पास है उससे वेरिफिकेशन में दिक्कत नहीं आएगी। पर जो डाटा उपलब्ध ही नहीं है, वैसे सर्टिफिकेट जारी करने में समस्या होगी।

