माता-पिता के नाम पर ही होगा अब 5 साल तक के बच्चों का इलाज: आरएस शर्मा

पहले एक साल तक के बच्चों को आधार कार्ड और राशन कार्ड में ना होने की छूट थी लेकिन अब इसे बढ़ा कर पांच साल तक लिए कर दिया गया है

रांची: आयुष्मान भारत योजना के सीईओ आरएस शर्मा ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत अब पांच साल तक के बच्चों का इलाज राशन कार्ड और आधार कार्ड में बगैर नाम जुड़वाये ही होगा। उन्होंने बुधवार को रांची जिले के सदर अस्पताल, रानी चिल्ड्रेन हॉस्पिटल और रातू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण करने बाद यह बात कही।

उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज करवाने के लिए पहले एक साल तक के बच्चों को आधार कार्ड और राशन कार्ड में ना होने की छूट थी लेकिन अब इसे बढ़ा कर पांच साल तक लिए कर दिया गया है।

राशन कार्ड में माता-पिता का ही नाम होने से बच्चों का इलाज हो जायेग। ऐसे में अब पांच साल तक के बच्चों के इलाज के लिए उन्हें आधार कार्ड और राशन कार्ड की जरूरत नहीं होगी। उनका इलाज उनके माता-पिता के नाम पर ही होगा।

उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में आयुष्मान भारत योजना के तहत लोगों को काफी लाभ मिला है। ऐसे में लाभुकों के चिकित्सकीय लाभ में बढ़ोतरी की जायेगी।

आयुष्मान योजना के तहत जहां अभी पांच लाख रुपये तक का चिकित्सकीय लाभ मिल रहा, उसमें जल्द ही वृद्धि की जायेगी।

रांची का मॉडल देशभर में होगा लागू

आरएस शर्मा ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को इलाज में सहूलियत के लिए रांची का मॉडल देशभर में लागू होगा।

उन्होंने आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल में हो रहे इलाज और व्यवस्था को समझा। उन्होंने यह भी समझा कि कैसे एक जिला अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत क्लेम करने के मामले में देशभर में तीसरे स्थान पर है।

निरीक्षण के बाद उन्होंने कहा-‘आयुष्मान के लाभुकों को अपनी पहचान के लिए भटकना नहीं पड़े। इसके लिए रजिस्ट्रेशन से लेकर उनकी पहचान तक के लिए देशभर में एक कार्ड (टोकन) इश्यू किया जाएगा। ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसे फ्री में बांटा जाएगा, ताकि वो हॉस्पिटल में जाकर दावा कर सकें कि आयुष्मान के लाभुक हैं।

हॉस्पिटल को जोड़ने के साथ पैकेज चार्ज बढ़ाया जाएगा

शर्मा ने कहा कि देशभर में आयुष्मान के तहत ज्यादा से ज्यादा हॉस्पिटल्स को जोड़ा जाएगा। साथ ही हॉस्पिटल के पैकेज को रिजनेबल किया जाएगा, ताकि प्राइवेट हॉस्पिटल को इलाज के बदले उचित राशि मिल सकें।

प्राइवेट हॉस्पिटल की भागीदारी बढ़ाने के लिए ये जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट हॉस्पिटल के क्लेम का निपटारा जल्दी किया जाए। अगर किसी हॉस्पिटल के क्लेम में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है तो उन्हें ग्रीन चैनल में शामिल किया जाएगा। क्लेम सब्मिट करते ही 50 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। झारखंड में पहले से ही इस तरह का स्टेप लिया जा रहा है।

झारखंड में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का नाम बदल कर मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना कर देने के सवाल पर शर्मा ने कहा प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना ही आयुष्मान योजना है।

इसका नाम यही रहना चाहिए लेकिन राज्य की भागीदारी है तो राज्य अपना नाम जोड़ सकता है। नाम कुछ भी हो आयुष्मान भारत की ब्रांडिंग होना जरूरी है।

इस दौरान उन्होंने आयुष्मान की राशि से सदर अस्पताल में तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर का निरीक्षण किया। मरीजों से बात की और सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने पूछा कि क्या उनसे इलाज का किसी प्रकार का पैसा तो नहीं लिया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने रांची के प्राइवेट हॉस्पिटल रानी चिल्ड्रेन हॉस्पिटल व रातू सीएचसी का भी निरीक्षण किया।

सदर अस्पताल ने किया 11.5 करोड़ का क्लेम

आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कर राशि क्लेम करने के मामले में रांची सदर अस्पताल देशभर में तीसरे स्थान पर है। वहीं, पूर्वी भारत में शीर्ष पर है।

इस साल अस्पताल की तरफ से आयुष्मान योजना के तहत 11.55 करोड़ रुपए क्लेम किया गया है। इतना ही नहीं इलाज के बाद आने वाली राशि का अस्पताल के इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने में भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

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