सदर अस्पताल में दवाइयों की किल्लत, खाली हाथ लौट रहे मरीज

रांची सदर अस्पताल में दवाओं की भारी कमी से मरीज परेशान हैं, जरूरी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे इलाज का खर्च बढ़ गया है और गरीब मरीज प्रभावित हैं।

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रांची : रांची के सदर अस्पताल में इन दिनों दवाइयों की कमी मरीजों के लिए सिर दर्द बन गई है। अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों को जरूरी दवाएं नहीं मिलने के कारण खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। डॉक्टरों द्वारा लिखी गई अधिकांश दवाएं अस्पताल के दवा वितरण केंद्र में उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को बाहर की मेडिकल दुकानों से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज और दवा की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन यहां जरूरी दवाएं ही उपलब्ध नहीं हैं।

डॉक्टरों की पर्ची में आधे से ज्यादा ब्रांडेड दवाएं

ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों की जेब पर बोझ पड़ रहा है। कई मरीजों ने बताया कि डॉक्टरों की पर्ची में लिखी गई आधे से अधिक दवाएं ब्रांडेड होती हैं, जो अस्पताल के स्टॉक में नहीं मिलतीं। मजबूरी में उन्हें बाजार से ज्यादा कीमत देकर दवा खरीदनी पड़ती है, जिससे इलाज का खर्च बढ़ जाता है।

85 दवाएं उपलब्ध है सदर हॉस्पिटल के दवा वितरण केंद्र में

दवा वितरण केंद्र के प्रभारी ने बताया कि फिलहाल दवा वितरण केंद्र में लगभग 85 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। हालांकि मरीजों की जरूरत और डॉक्टरों द्वारा लिखी जाने वाली दवाओं की तुलना में यह संख्या पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि वैसे तो 354 दवाओं की लिस्ट है। कुछ दवाओं का स्टॉक खत्म हो चुका है, जबकि कुछ दवाओं की आपूर्ति लंबे समय से प्रभावित है।

दवा सप्लाई में कमी का प्रबंधन दे रहा हवाला

इस मामले में सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार का कहना है कि दवाओं की कमी का मुख्य कारण सप्लाई में आ रही बाधाएं हैं। संबंधित एजेंसियों से समय पर दवाओं की आपूर्ति नहीं होने के कारण स्टॉक प्रभावित हुआ है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही नई खेप आने के बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में दवाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। दवाओं की सप्लाई पर काफी असर पड़ा है। दो देशों के बीच चल रहे युद्ध के कारण कई सारी दवाओं की सप्लाई नहीं हो पा रही है। मरीजों को अस्पताल में ही आवश्यक दवाएं नहीं मिलेंगी तो स्थिति खराब हो सकती है।

क्या कहते हैं मरीज और उनके परिजन

मरीज के परिजन गिरजा लाल ने कहा कि डॉक्टर से दिखाने के बाद दवा लेने के लिए काउंटर पर गया था। डॉक्टर की लिखी एक भी दवा वितरण केंद्र में नहीं मिली। सभी दवा बाहर से खरीदने को कहा गया है। हम लोग आर्थिक रूप से कमजोर है। ऐसे में दवा बाहर से खरीदना मुश्किल है।

बाहर से दवा खरीदने में मरीजों के छूट रहे पसीने

वहीं नीमा चंद गोराई ने कहा कि डॉक्टर से दिखाने के बाद कुछ दवा नहीं मिली। यह दवा अब बाहर मेडिकल से खरीदने को कहा गया है। इस चक्कर में काफी पैसे खर्च हो जाएंगे। सरकार को इसके लिए व्यवस्था करने की जरूरत है।

शशि भूषण कुमार ने कहा कि पत्नी को डॉक्टर से दिखाया था। डॉक्टर ने जो दवाई लिखी उसमें केवल एक दवा डिस्पेंसरी से मिली। बाकी की दवाओं के लिए बाहर जाने को कहा गया। प्राइवेट मेडिकल से दवा खरीद के लाने पर भी डॉक्टर ने उसे गलत बताया। हम लोग दवाई कहां से खरीदेंगे।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।