
रांची: रांची विश्वविद्यालय के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतर-महाविद्यालय खेलकूद प्रतियोगिता में सूरज सिंह मेमोरियल महाविद्यालय, रांची ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला और पुरुष दोनों वर्ग में ओवरऑल चैंपियन का गौरव हासिल किया।
वर्गवार परिणाम
- महिला वर्ग: सूरज सिंह मेमोरियल महाविद्यालय, रांची
- पुरुष वर्ग: रामलखन सिंह यादव महाविद्यालय, रांची
इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में रांची विश्वविद्यालय से जुड़े 15 महाविद्यालयों के कुल 252 खिलाड़ी शामिल हुए। प्रतियोगिता के दौरान विभिन्न खेल स्पर्धाओं का सफल आयोजन हुआ। प्रदर्शन के आधार पर रामचंद्र सांगा (रामलखन सिंह यादव महाविद्यालय) और सुश्री आकांक्षा (सूरज सिंह मेमोरियल महाविद्यालय) को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया।
समापन समारोह और अतिथियों की बातें
समापन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. सुदेश कुमार साहू (डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर, रांची विश्वविद्यालय) थे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “पढ़ाई और खेल एक-दूसरे के पूरक हैं। जिन संस्थानों में संसाधनों की कमी है, वहाँ के विद्यार्थी खेल को अपनाकर नई ऊँचाइयों तक पहुँच सकते हैं। खेल केवल खिलाड़ी बनने तक सीमित नहीं है, बल्कि कोच, प्रशिक्षक, शोधकर्ता और प्रशासक के रूप में भी अवसर देता है।”
उन्होंने आगे कहा कि खेल विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता विकसित करता है, जो जीवन की हर चुनौती में मददगार साबित होती है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि, शेखर जमुआर (कार्यकारी निदेशक, खेल, युवा कार्य एवं संस्कृति निदेशालय) रहें। उन्होंने कहा कि “जीवन में किसी भी काम को पूरी लगन, समर्पण और अनुशासन के साथ करें। शुरुआती 25–30 वर्षों में मेहनत कर ली जाए, तो आगे का जीवन स्वतः सफल होता है। पढ़ाई और खेल—दोनों पर समान ध्यान देना सफलता की कुंजी है।” उन्होंने सूरज सिंह मेमोरियल महाविद्यालय के नेतृत्व की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि “सशक्त नेतृत्व से प्रत्येक विद्यार्थी उत्कृष्ट बनता है। यह गर्व की बात है कि रांची विश्वविद्यालय के कई श्रेष्ठ खिलाड़ी इसी महाविद्यालय की देन हैं।”
अध्यक्षीय संबोधन
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. बी. पी. वर्मा ने की। उन्होंने कहा कि “हार और जीत प्रतियोगिता का हिस्सा हैं। खेल वह मंच है जहाँ विद्यार्थी संघर्ष, धैर्य और आत्म-अनुशासन सीखते हैं। अनुशासित जीवन शैली से कोई भी व्यक्ति सफलता से वंचित नहीं रह सकता।” उन्होंने अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए डॉ. अनिल बीरेंद्र कुल्लू के शब्द साझा किए। कहे कि “जो पानी से नहाते हैं, वे लिबास बदलते हैं; किन्तु जो पसीने से नहाते हैं, वे इतिहास बदलते हैं।”
इनकी रही उपस्थिति
समापन समारोह में डॉ. बंदना राय, प्रो. एन. के. पांडेय, डॉ. अनिल बीरेंद्र कुल्लू, डॉ. जुरन सिंह मानकी, डॉ. सीमा सुरीन, डॉ. अनुपमा सिंह, डॉ. अनीता कुमारी गुप्ता, डॉ. राजेश कुजूर, जितेंद्र प्रसाद, अजय प्रसाद सहित सूरज सिंह मेमोरियल महाविद्यालय के सभी शैक्षिक और गैर-शैक्षिक कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन खेल भावना, अनुशासन और उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाओं के साथ किया गया।

