झारखंड

झारखंड में अब ऑनलाइन होंगे राशन कार्ड, आर्थिक रूप से संपन्न लोग नहीं उठा सकेंगे राशन

इसी शुरुआत खाद्य विभाग के मंत्री मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव कर दी है

रांची: राशन की कालाबाजारी (Black marketing) रोकने और संपन्न लोगों द्वारा राशन उठाव करने पर लगाम लगाने के लिए सरकार नई व्यवस्था करने जा रही है।

इसके तहत झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के हरा राशन कार्ड (Ration card) अब स्वत: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के पीला और लाल राशन कार्ड में ऑनलाइन हो जाएंगे। इसी शुरुआत खाद्य विभाग के मंत्री मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव कर दी है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में खाली होते ही हरा कार्ड के लाभुक ऑटोमेटिक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में शिफ्ट हो जाएंगे।

इस व्यवस्था के शुरू होने से हरा राशन कार्ड से लाल-पीला कार्ड में शिफ्टिंग में अलग से किसी प्रकार की प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी।

साथ ही, किसी भी समय राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National Food Security Act) रिक्ति की स्थिति नहीं होगी। इसी के साथ डॉ रामेश्वर उरांव ने गुरुवार को 8533 हरा राशन कार्ड के लाभुकों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियमि में शिफ्ट किया।

इसमें 932 पीवीटीजी लाभुक, 5685 विधवा, 61 दिव्यांग, 32 कैंसर-एड्स-कुष्ठ व अन्य असाध्य रोग से ग्रसित व्यक्ति, 55 वृद्ध व एकल व्यक्ति और 1768 अनुसूचित जनजाति के लाभुक शामिल हैं।

फर्जी या आर्थिक रूप से संपन्न लोग नहीं ले सकेंगे इसका लाभ

झारखंड राज्य गठन के बाद यह पहला अवसर हैं जह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में रिक्ति को शत प्रतिशत भर दिया गया है।  राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में 2,84,25,385 लक्ष्य है।

पहले लाभुकों की एक कार्ड से दूसरे में शिफ्टिंग जिला के माध्यम से होती थी। इसमें लंबा समय लगता था। कुछ कार्यालय द्वारा लाभुकों के साथ भेदभाव किया जाना और अन्य प्रकार की शिकायते मिलती थी।

इसे दूर करने के लिए ही एनआईसी के सहयोग से ऑटोमेटिक शिफ्टिंग (Automatic Shifting) का मॉड्यूल विकसित किया गया है। वहीं, राज्य खाद्य सुरक्षा योजना में 15 लाख लाभुकों को हरा राशन कार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है।

इस वित्तीय वर्ष पांच लाख नए लाभुकों को इससे जोड़ने का लक्ष्य है। राशन कार्ड के ऑनलाइन करने से अब केवल लाभार्थी को ही राशन का लाभ मिल सकेगा।

ऐसे में फर्जी या आर्थिक रूप से संपन्न लोग इसका लाभ नहीं ले सकेंगे। ऑनलाइन होने से अब केवल संबंधित व्यक्ति ही मौके पर जाकर अपने फिंगर प्रिंट (Finger Print) का निशान देकर इसका लाभ ले सकेगा। ऐसा होने से कई और गरीब लोगों को इसमें जोड़ा जा सकेगा।