विश्वकप 2026 एक परीकथा की तरह था और उसका फ़ाइनल एक दु:स्वप्न की तरह

विश्व कप 2026 फाइनल में स्पेन की जीत और अर्जेंटीना की हार पर गहन विश्लेषण। मेस्सी, फुटबॉल शैली, रणनीति और मैच के निर्णायक पलों को लेकर चर्चा।

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सुशोभित

विश्वकप 2026 एक परीकथा की तरह था और उसका फ़ाइनल एक दु:स्वप्न की तरह। यह दु:स्वप्न पूरी दुनिया की आँखों के सामने 120 मिनटों तक चलता रहा। अर्जेन्तीना ने ‘डर्टी, डिस्ग्रेसफ़ुल फ़ुटबॉल’ खेला। इस तरह के मैच हम अकसर लीग-फ़ुटबॉल में देखते हैं, जहाँ चेल्सी या एटलेटिकाे मैड्रिड जैसी टीमें ख़राब खेलकर भी एक पॉइंट (ड्रॉ) अर्जित करने की कोशिश करती हैं। लेकिन यह कोई लीग-मुक़ाबला नहीं था, यह विश्वकप का फ़ाइनल था। विश्वकप का फ़ाइनल फ़ुटबॉल का सबसे बड़ा मैच होता है और इसे नियमित-फ़ुटबॉल को फ़ॉलो नहीं करने वाले भी देखते हैं। इन अर्थों में अर्जेन्तीना ने फ़ुटबॉल की एक बुरी छवि दुनिया के सामने प्रस्तुत की। यह इस महान खेल के साथ विश्वासघात था, उसकी अवमानना थी। और चूँकि हम फ़ुटबॉल को एक ‘रिलीजन’ की तरह मानते हैं और उसकी सौन्दर्यशास्त्रीय-नैतिकता को अपने जीवन का एक महत्त्वपूर्ण आयाम स्वीकारते हैं, इसलिए हम लज्जारुण (एम्बैरेस्ड) हैं कि जिस अर्जेन्तीना टीम को हम वर्षों से सपोर्ट करते आ रहे हैं, उसने इतने बड़े मंच पर ऐसा दाग़दार उदाहरण प्रस्तुत किया और यह सिद्ध किया कि यह टीम फ़ाइनल खेलने के योग्य नहीं थी।

यह दो खेल-शैलियों का टकराव था। ब्राज़ील और अर्जेन्तीना का द्वैत। ब्राज़ील वाले जोगा-बनीतो (ब्यूटीफ़ुल-फ़ुटबॉल) खेलने पर ज़ोर देते हैं, फिर भले ही हार जाएँ। अर्जेन्तीना वाले ऐतिहासिक रूप से येन-केन-प्रकारेण जीतने में यक़ीन रखते हैं। इसे होसे मरीनियो और पेप गोर्डिओला के परिप्रेक्ष्य में भी समझा जा सकता है। होसे मरीनियो समझते हैं कि फ़ुटबॉल का मैच जीतने के लिए होता है, फिर उसके लिए चाहे जो करना पड़े। वर्तमान में उनकी इस फिलॉस्फ़ी को एटलैटिको मैड्रिड के कोच दिएगो सिमियोने सामने रखते हैं (यह अकारण नहीं है कि मौजूदा अर्जेन्तीनी टीम के अनेक खिलाड़ी एटलेटिको मैड्रिड में खेलते हैं, जिनमें स्वयं दिएगो के बेटे जूलियानो भी शामिल हैं)। दूसरी दृष्टि योहान क्राएफ़ और पेप गोर्डिओला जैसों की है, जो समझते हैं कि फ़ुटबॉल का खेल सुंदरता से खेला जाना चाहिए, फ़ेयर-प्ले होना चाहिए, दर्शकों को उम्दा खेल की दावत दी जानी चाहिए।

बार्सीलोना इस दृष्टि का प्रतिनिधित्व करती है। यह भी अकारण नहीं है कि बीती रात स्पेन की विनिंग-स्क्वाड में बार्सीलोना के 8 खिलाड़ी खेल रहे थे। इन अर्थों में स्पेन के माध्यम से बार्सीलोना की फ़ुटबॉलिंग-फिलॉस्फ़ी की जीत हुई है। लेकिन इसका सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि बार्सीलोना की अकादमी से निकले सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी और उसके सबसे बड़े लेजेंड लियोनेल मेस्सी बीती रात अर्जेन्तीना से खेल रहे थे! आप इस विडम्बना को समझ पा रहे हैं? जब मेस्सी युवा थे, तब स्पेन ने उन्हें अपनी राष्ट्रीय टीम में शामिल करने के भरसक प्रयास किए थे, लेकिन मेस्सी इस पर अड़े रहे कि वे अर्जेन्तीना का ही प्रतिनिधित्व करेंगे। वे रोज़ेरियों की गलियों से निकलकर आए हैं और अपनी राष्ट्रीयता के प्रति गर्वीली भावना रखते हैं। उनका वह निर्णय सही था, जिसे उन्होंने कालान्तर में अर्जेन्तीना के लिए चार ट्रॉफियाँ जीतकर न्यायोचित क़रार दिया। लेकिन मेस्सी की खेल-शैली स्पेन वाली है, अर्जेन्तीना वाली नहीं। बीती रात वे एक ऐसे खिलाड़ी की तरह थे, जिनका मर्म कहीं और था, और निष्ठा कहीं और थी।

अर्जेन्तीना के कोच लियोनेल स्कोलनी ने अपनी स्टार्टिंग-इलेवन में लियान्द्रो परेदेस की जगह नीको गोन्ज़ालेस को उतारकर अटैकिंग-इंटेंट का सबूत दिया, लेकिन पहले-हाफ़ में वह तत्परता कहीं नज़र नहीं आई और अन्तत: दूसरे हाफ़ की शुरुआत में उन्होंने अपना यह निर्णय बदला। अर्जेन्तीना को तुरंत समझ आ गया था कि उनका सामना तकनीकी रूप से उनसे कहीं श्रेष्ठ-टीम से है। स्पैनिशों के सामने वो गेंद को अपने पास नहीं रख सकते थे। तब उन्होंने फ़ॉउल जीतने की अपनी सुपरिचित डर्टी-ट्रिक्स का परिचय दिया। आप कह सकते हैं कि अर्जेन्तीना अगर निगेटिव-फ़ुटबॉल नहीं खेलती तो 4 या 5 गोल खाकर शर्मसार होती। इसके बजाय उसने खेल को एक्स्ट्रा-टाइम और पेनल्टी-शूटआउट तक खींचने की कोशिश की। यह विवेक-बुद्धि के अनुसार सही निर्णय हो सकता था, लेकिन यह खेल की सौन्दर्यशास्त्रीय-नैतिकता के विरोध में था।

एक ज़रूरी डिटेल को ध्यान में रखना होगा। खेल के पहले हाफ़ में अर्जेन्तीना ने अपने सेंटर-बैक लिसान्द्रो मार्तीनेज़ को चोट के कारण गँवा दिया। वे टीम के महत्त्वपूर्ण खिलाड़ी थे और इस विश्वकप में केप-वर्दे के विरुद्ध खेले गए मैच में गोल और असिस्ट कर चुके थे। यह इसी विश्वकप में लगातार चौथी बार था, जब स्पेन के खिलाफ़ खेल रही टीम ने नॉकआउट मुक़ाबलों में अपना कोई महत्त्वपूर्ण खिलाड़ी चोट के कारण गँवाया हो : इससे पहले पुर्तगाल के नूनो मेन्देज़, बेल्जियम के थिबा कोर्तुआ, फ्रांस के विलियम सलीबा भी इसी तरह से बाहर हो चुके थे। भाग्य स्पेन के साथ था। कहते हैं : फ़ार्च्यून फ़ेवर्स द ब्रेव। लेकिन यहाँ भाग्य ने साहसी के साथ ही सर्वश्रेष्ठ का भी साथ दिया।

विश्वकप के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी क़रार दिए गए रोद्री (इस गोल्डन-बॉल पर मेस्सी का हक़ था, लेकिन पराजित को कभी कुछ नहीं मिलता) ने पूरे खेल को मिडफ़ील्ड से रन किया। रोद्री, रूइज़, पेद्री की मिडफ़ील्ड को अर्जेन्तीना लाँघ नहीं सकी और फ़ॉरवर्ड और डिफ़ेंसिव लाइन के बीच सम्पर्क टूट गया। फ़ॉरवर्ड-लाइन अलग-थलग (स्ट्रैंडेड) रह गई। मेस्सी और अल्वारेज़ एक अच्छे पास के लिए तरस गए। एन्ज़ो फ़र्नान्दीज़ ने पहले एक ग़ैर-ज़रूरी प्रोटेस्ट और फिर एक बेपरवाह टेकल करके रेड-कार्ड ले लिया, इसलिए लॉतारो मार्तीनेज़ को उतारा ही नहीं गया। एन्ज़ो के रेड के बाद अर्जेन्तीना के पास डिफेन्सिव-किलेबंदी के साथ पेनल्टी-शूटआउट के लिए खेलने के सिवा कोई चारा नहीं था। लेकिन इस स्पेन के सामने आप 10 खिलाड़ियों के साथ नहीं टिक सकते थे, जब 11 के साथ भी आप बेबस रहे हों। शुरुआती 90 मिनटों में अर्जेन्तीना एक भी शॉट अटेम्प्ट नहीं कर पाई। एक्स्ट्रा-टाइम में नीको विलियम्स का गोल रद्द किया जाना शर्मनाक था। इसीलिए जब फ़ेरान तोरेस ने विनर दाग़ा, तो हम अर्जेन्तीना-समर्थकों ने भी राहत की साँस ली। हम एक गंदी, बेईमान जीत का जश्न नहीं मना सकते थे।

जीवन पद्य नहीं गद्य की तरह होता है। 2022 में अर्जेन्तीना की जीत एक काव्य थी, परीकथा थी। 2026 ने हमें वास्तविकता के कठोर-धरातल पर ला पटका। सपने टूट गए। मेस्सी के कॅरियर की सन्ध्यावेला विरूपित हो गई। कलंकित हो गई। फ़ुटबॉल हारी, और फ़ुटबॉल जीती। स्पेन की जीत में फ़ुटबॉल की जीत थी, मेस्सी की हार में फ़ुटबॉल की हार। हमारा एक मन स्पेन, तो एक अर्जेन्तीना के साथ था, लेकिन हमारा पूरा मन मेस्सी के साथ था। हम इस विपर्यय में पिस गए। दिवास्वप्न समाप्त हुआ। अब हमें म्लान-मुख लेकर अपने जीवन के रूखे धरातल पर फिर से लौट जाना है। इससे अधिक कहने को आज कुछ नहीं। वीवा एस्पान्या, वीस्का-एल कातालून्या, वामोस अर्ख़ेन्तीना… लॉन्ग-लिव फ़ुटबॉल…

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।