
नई दिल्ली : वाइल्डबेरीज (Wildberries) की फाउंडर और रूस की सबसे अमीर महिला तात्याना किम अपने बिजनेस करियर की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रही हैं। देश के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर के वेयरहाउस पर यूक्रेन ने ड्रोन से कई हमले किए हैं।
द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, इन हमलों में रूस भर में वाइल्डबेरीज के अहम लॉजिस्टिक्स सेंटर्स को निशाना बनाया गया है। इससे कंपनी के कामकाज में बड़ी रुकावट आई है और इस प्लेटफॉर्म पर निर्भर हजारों सेलर्स पर असर पड़ा है।
वाइल्डबेरीज को रूस का अमेजन कहा जाता है। यह कंपनी देश के ऑनलाइन शॉपिंग मार्केट के एक बड़े हिस्से को संभालती है। इस कंपनी की शुरुआत 2004 में किम ने की थी और यह एक छोटे से बिजनेस से बढ़कर रूस की सबसे सफल टेक्नोलॉजी कंपनियों में से एक बन गई। आज, यह रूसी अर्थव्यवस्था में एक अहम भूमिका निभाती है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में कई गोदाम नष्ट या क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और ग्राहकों को देरी का सामना करना पड़ रहा है। कई छोटे व्यवसायों का सामान नष्ट हो गया है, जिससे मुआवजे और भविष्य की बिक्री को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।
यूक्रेन का कहना है कि ये गोदाम वैध निशाने हैं क्योंकि माना जाता है कि ये रूस की युद्ध की कोशिशों में मदद करते हैं। यहां ऐसा सामान रखा जाता है जिसका इस्तेमाल सेना कर सकती है। रूसी अधिकारी इस दावे को खारिज करते हैं और इन जगहों को आम नागरिकों के इस्तेमाल का बुनियादी ढांचा बताते हैं।
किम ने इन हमलों की सार्वजनिक रूप से निंदा की है और कहा है कि कंपनी प्रभावित सेलर्स की मदद के लिए काम कर रही है। हालांकि, इस नुकसान ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि अगर यह कैंपेन जारी रहता है तो वाइल्डबेरीज कितनी बड़ी रुकावट झेल सकती है। खबरों के मुताबिक, बिक्री में गिरावट आई है और कई वेंडर दूसरे प्लेटफॉर्म की तलाश करने लगे हैं।
द न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया है कि ये हमले यूक्रेन की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा हैं। इस रणनीति का मकसद सिर्फ सैन्य ठिकानों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय रूस के अहम कमर्शियल और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को निशाना बनाकर उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।
जानकारों का कहना है कि यह अभियान दिखाता है कि युद्ध किस तरह रूस के अंदर रोजमर्रा की आर्थिक जिंदगी पर तेजी से असर डाल रहा है। किम के लिए अब चुनौती सिर्फ क्षतिग्रस्त सुविधाओं को फिर से खड़ा करने की ही नहीं, बल्कि ग्राहकों, विक्रेताओं और निवेशकों का भरोसा बनाए रखने की भी है।

