वनोत्पाद से बढ़ेगा स्वरोजगार, रुकेगा पलायन : शिल्पी नेहा तिर्की

कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि वनोत्पाद और वैज्ञानिक लाह खेती से ग्रामीणों को स्वरोजगार मिलेगा, किसानों की आय बढ़ेगी और झारखंड से पलायन रुकेगा।

Razi Ahmad
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Shilpi Neha Tirkey: कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा है कि वनोत्पाद से स्वरोजगार बढ़ेगा और पलायन रुकेगा। उन्होंने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों और वनोत्पादों से समृद्ध राज्य है। ऐसे में पलायन रोकने में स्वरोजगार की भूमिका महत्वपूर्ण है। वे बुधवार को लापुंग प्रखंड स्थित स्टेडियम में सिदो- कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लिमिटेड (सिद्धकोफ़ेड) द्वारा आयोजित वैज्ञानिक पद्धति आधारित एक दिवसीय क्षेत्रीय लाह खेती प्रशिक्षण और टूलकिट वितरण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थीं।

शिल्पी ने कहा कि लाह, इमली, चिरौंजी, महुआ, मधु, करंज बीज, कुसुम बीज, साल बीज, हरड़ा-बहेड़ा, आंवला तथा विभिन्न औषधीय पौधों की घरेलू ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में भी व्यापक मांग है। इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी वनोत्पादों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कार्यक्रम के दौरान प्रखंड की मालगो, बोकरोन्दा एवं ककरिया पंचायतों के कुल 377 किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से लाह खेती का प्रशिक्षण दिया गया तथा आवश्यक टूलकिट का वितरण किया गया। साथ ही आगामी जून–जुलाई माह में प्रत्येक किसान को 5-5 किलो की दर से कुसुमी एवं रंगीनी लाह बीहन शत-प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया जाएगा।

शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि पंचायत स्तर पर एमपीसीएस (MPCS) के माध्यम से वनोपजों की पहचान कर परिष्करण इकाइयों की स्थापना, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं विपणन प्रबंधन को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, ताकि ग्रामीण उत्पादकों को घरेलू बाजार से लेकर वैश्विक बाजार तक लाभकारी मूल्य प्राप्त हो सके। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि राज्य से होने वाले पलायन को रोकने में भी मदद मिलेगी तथा ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

मंत्री ने कहा कि इस दिशा में व्यापक जनअभियान चलाने की आवश्यकता है, जिसमें सिद्धकोफ़ेड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।उन्होंने किसानों को अल नीनो (El Nino) से उत्पन्न संभावित परिस्थितियों के प्रति सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा कि वैज्ञानिकों के अनुसार इस वर्ष औसत से कम वर्षा होने की संभावना है। ऐसी स्थिति में किसानों को शुरुआती वर्षा के साथ ही धान रोपनी पूरी कर लेनी चाहिए तथा कम पानी में होने वाली फसलों की ओर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने मडुवा को एक बेहतर विकल्प बताया।

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्धों के कारण डीएपी एवं यूरिया की उपलब्धता प्रभावित हो रही है, जिसके कारण राज्यों को मांग के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे समय में विभाग के साथ-साथ किसानों को भी मानसिक रूप से तैयार रहने की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि 22 मई को राज्य के सभी प्रखंडों में आयोजित होने वाली खरीफ कर्मशाला में भाग लेकर कृषि संबंधी आवश्यक जानकारी एवं योजनाओं का लाभ उठाएं।मंत्री ने किसानों के उत्साह, आत्मविश्वास एवं लाह उत्पादन के प्रति सकारात्मक सोच की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले समय में झारखंड देश में लाह उत्पादन के क्षेत्र में एक मजबूत और नई पहचान स्थापित करेगा।

उन्होंने कहा कि लापुंग प्रखंड भले ही रांची जिले के पिछड़े क्षेत्रों में गिना जाता हो, लेकिन यहाँ की भौगोलिक एवं प्राकृतिक परिस्थितियाँ लाह उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। उनका संकल्प है कि आने वाले समय में लापुंग को राज्य के प्रमुख लाह उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो और क्षेत्र आर्थिक रूप से सशक्त बन सके।

उन्होंने कहा कि लाह खेती केवल कृषि गतिविधि नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन करने तथा पलायन रोकने का प्रभावी माध्यम है। यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति से इस खेती को अपनाएँ, तो यह आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन सकती है।

मंत्री ने कहा कि विभाग द्वारा लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन, गुणवत्तापूर्ण लाह बीहन एवं आवश्यक टूलकिट का वितरण किया जा रहा है। किसानों से अपील है कि वे इन योजनाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जुड़कर अधिक से अधिक लाभ उठाएँ।

उन्होंने अंत में कहा कि किसानों की समृद्धि, ग्रामीण विकास एवं आत्मनिर्भर झारखंड के निर्माण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता निरंतर जारी रहेगी।

इस अवसर पर सिद्धकोफ़ेड के सचिव राकेश कुमार, जिला सहकारिता पदाधिकारी रविंद्र दास, बीडीओ उषा मिंज, अंचलाधिकारी पंकज कुमार, प्रखंड अध्यक्ष जयंत बारला, सुदामा महली, प्रमुख कंचन उरांव, उप प्रमुख विश्वनाथ मुंडा, सरोज मुंडा, जनमेजय पाठक, देवन्ती देवी सहित कई जनप्रतिनिधि और किसान उपस्थित थे।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।