मोदी के खिलाफ तीखी और विवादित टिप्पणी क्यों करते हैं खड़गे?

मोदी पर खड़गे की तीखी टिप्पणियां फिर चर्चा में हैं। क्या बीजेपी अब ऐसे बयानों का चुनावी फायदा उठाने में पहले जैसी सफल नहीं हो रही? जानिए राजनीतिक विश्लेषण।

News Aroma
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पुष्यमित्र
पटना में श्रीकृष्ण सिंह जयंती समारोह के मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी के खिलाफ तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, मोदी का बाप भी जाएगा। इस टिप्पणी के बाद ऐसा लगा कि बीजेपी इसे अपने पक्ष में भुनाने की भरपूर कोशिश करेगी जिससे उसे मौजूदा परीक्षा, युवा और चुनाव संबंधी विवादों के झमेले से छुटकारा मिल सके। यह बीजेपी का जांचा परखा दाव रहा है, मोदी के खिलाफ हर विवादास्पद टिप्पणी को वे अपने पक्ष में भावनात्मक माहौल बनाने में इस्तेमाल कर लेते हैं। इस बार भी पटना में बीजेपी नेता सड़कों पर उतरे मगर दिखा कि लगातार सत्ता की आदत ने उन्हें लड़ने भिड़ने के मामले में कमजोर कर दिया है। लोग कम आए, प्रतीकात्मक विरोध हुआ और माहौल बना नहीं।
यह भारत की राजनीति का एक पॉपुलर मुहावरा बन गया है कि अपनी तरफ फेंके गए पत्थरों को अपना हथियार बनाने में मोदी उस्ताद हैं। फिर चाहे गुजरात चुनाव में उन्हें सोनिया गांधी ने मौत का सौदागर कहा हो या 2014 के चुनाव के वक्त मणिशंकर अय्यर ने उन्हें नींच कहा। दोनों बातों का उन्होंने भरपूर फायदा उठाया। मगर अब सत्ता के तीसरे टर्म के आसपास वह मामला घिसने लगा है, इसलिए खड़गे लगातार बेहिचक मोदी पर तीखे हमले करते हैं। यह उनका पहला हमला नहीं है।
उदाहरणों से समझें
इसी साल अप्रैल महीने में खड़गे ने मोदी को तमिलनाडु चुनाव के पहले ‘आतंकवादी’ कहा। बीजेपी मामले को चुनाव आयोग में तो ले गई, मगर कांग्रेस को इस बयान का कोई नुकसान या बीजेपी को कोई फायदा नहीं हुआ।
मई, 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान खड़गे ने हरियाणा में मोदी को ‘झूठो का सरदार’ कहा। बीजेपी ने इसे चुनाव में लाभ उठाने का मौका समझा। मगर पार्टी 240 सीटों पर अटक गई।
अप्रैल, 2023 कर्नाटक विधानसभा चुनाव में खड़गे ने मोदी को ‘जहरीला सांप’ कहा था। मुद्दा खूब उछला। बीजेपी ने परसेप्शन बनाने की कोशिश की। मगर कांग्रेस को अच्छी जीत मिली।
नवंबर, 2022 में खड़गे ने गुजरात चुनाव में मोदी की तुलना रावण से की थी। गुजरात चुनाव बीजेपी जीतती रही है। ऐसा नहीं कह सकते कि खड़गे के इस बयान से बीजेपी को कोई खास लाभ मिला।
इसलिए ऐसा लगता है कि अपने ऊपर फेंके गए पत्थर को हथियार बनाने का मोदी और बीजेपी का कौशल अब चूकने लगा है और खड़गे इस बात को समझ गए हैं।
बाकी यह कौशल बीजेपी को प्रशांत किशोर ने सिखाया था, अब उनसे पूछना चाहिए कि यह दांव अब क्यों काम नहीं कर रहा!
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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