छात्रों के लिए बड़ी खबर: रांची यूनिवर्सिटी में कम होंगी ग्रेजुएशन सीटें, बढ़ेगा कटऑफ ! एडमिशन के लिए होगी मारामारी

इंटर रिजल्ट के बाद ग्रेजुएशन एडमिशन की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बड़ी खबर, क्लस्टर सिस्टम लागू होने पर रांची विश्वविद्यालय में हजारों सीटें कम हो सकती हैं।

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रांची : इंटरमीडिएट रिजल्ट के बाद अब हजारों छात्रों की नजर ग्रेजुएशन एडमिशन पर टिकी है। हर साल बड़ी संख्या में विद्यार्थी रांची विश्वविद्यालय के कॉलेजों में दाखिला लेते हैं, लेकिन इस बार हालात थोड़े अलग और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। राज्य सरकार द्वारा लागू किए जा रहे क्लस्टर सिस्टम के कारण स्नातक स्तर पर सीटों में 10 से 15 प्रतिशत तक की कटौती की संभावना जताई जा रही है। रांची विश्वविद्यालय के अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों में फिलहाल एडमिशन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन क्लस्टर सिस्टम लागू होने का इंतजार कर रहा है। नए सिस्टम के तहत सीटों का अंतिम निर्धारण होने के बाद ही नामांकन शुरू किया जाएगा। इस देरी से छात्रों में असमंजस की स्थिति है। उन्हें अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस बार कितनी सीटें उपलब्ध होंगी और एडमिशन कब शुरू होगा।

घट सकती हैं 4 हजार सीटें

अभी रांची विश्वविद्यालय में लगभग 40 हजार सीटों पर स्नातक में दाखिला होता है। लेकिन क्लस्टर सिस्टम लागू होने के बाद यह संख्या घटकर करीब 36 हजार तक पहुंच सकती है। इसका सीधा असर छात्रों पर पड़ेगा, क्योंकि सीमित सीटों के लिए मुकाबला और तेज हो जाएगा। अच्छे अंक लाने वाले छात्रों के लिए भी पसंदीदा कॉलेज और विषय पाना आसान नहीं रहेगा।

क्यों हो रही है सीटों में कटौती?

नई व्यवस्था में सीटों का निर्धारण अब कॉलेजों के शिक्षक, संसाधन और क्षमता के आधार पर किया जाएगा। अभी कई कॉलेज अपनी क्षमता से ज्यादा सीटों पर एडमिशन लेते रहे हैं, जिससे कक्षाओं पर दबाव बढ़ता है। उदाहरण के तौर पर, जहां पहले किसी विषय में 150 सीटें होती थीं, अब यह संख्या घटकर लगभग 120 तक सीमित हो सकती है।

 DSPMU में पहले से लागू है मॉडल

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में यह सिस्टम पहले से लागू है। यहां पारंपरिक कोर्स में 120 और पीजी में 60 सीटों पर ही एडमिशन होता है। हालांकि पहले कई विभागों में 130 से 140 सीटों तक दाखिला होता था, लेकिन अब वहां भी सीटों की कमी का असर दिखने लगा है।

JAC के आंकड़ों के अनुसार इस साल मैट्रिक में 4 लाख से अधिक छात्र पास हुए हैं, जबकि इंटरमीडिएट के तीनों स्ट्रीम मिलाकर करीब 2.97 लाख छात्र सफल हुए हैं। इनमें से बड़ी संख्या में विद्यार्थी अब ग्रेजुएशन में दाखिले की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में सीटें कम होने से हजारों छात्रों के लिए एडमिशन पाना चुनौती बन सकता है।

अंतिम फैसला क्लस्टर सिस्टम के बाद

रांची विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू डॉ. सुदेश कुमार साहू के अनुसार अभी सीटों की अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। क्लस्टर सिस्टम लागू होने के बाद ही वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय सरकार के निर्देशों का इंतजार कर रहा है। इसके बाद ही एडमिशन प्रक्रिया शुरू होगी। फिलहाल इतना तय है कि इस साल ग्रेजुएशन एडमिशन के लिए छात्रों को पहले से ज्यादा प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा और कटऑफ भी बढ़ सकता है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।