
Land Dispute : जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े एक विवाद में धोखाधड़ी, आपराधिक न्यास भंग और धमकी जैसी धाराओं के तहत संज्ञान लेने की मांग को लेकर दायर पुनरीक्षण याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है। न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा की अदालत ने शिकायतकर्ता मनोज वर्मा की याचिका निरस्त करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा।
मामला शिकायतवाद संख्या 9553/2024 से संबंधित है। शिकायतकर्ता मनोज वर्मा ने दिनानाथ बनर्जी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, निचली अदालत ने जांच और गवाहों के बयानों के आधार पर केवल मारपीट, रास्ता रोकने और चोरी से जुड़ी धाराओं के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनते हुए संज्ञान लिया था।
इस आदेश को चुनौती देते हुए मनोज वर्मा ने पुनरीक्षण याचिका दाखिल की और अदालत से आरोपी पर धोखाधड़ी, आपराधिक न्यास भंग, गाली-गलौज और धमकी की धाराएं भी जोड़ने की मांग की।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि दोनों पक्षों के बीच वर्ष 2018 में जमीन बिक्री को लेकर समझौता हुआ था, जिसके तहत शिकायतकर्ता ने लगभग 21 लाख रुपये का भुगतान किया था। इसके बावजूद न तो बिक्री विलेख निष्पादित हुआ और न ही राशि वापस की गई।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह विवाद मुख्य रूप से अनुबंध या संविदात्मक दायित्वों के उल्लंघन से जुड़ा है, जिसे केवल आपराधिक मुकदमे का रूप नहीं दिया जा सकता। हालांकि, मारपीट, रास्ता रोकने और 10 हजार रुपये छीनने के आरोपों के संबंध में पर्याप्त प्रथम दृष्टया साक्ष्य मौजूद हैं।
इसी आधार पर अदालत ने माना कि निचली अदालत द्वारा केवल संबंधित धाराओं में संज्ञान लेना उचित था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि या अनियमितता नहीं है। परिणामस्वरूप पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया गया।

