
Mango Man : रहुआ गांव के राम किशोर सिंह ने दो नई आम की किस्में विकसित कर इलाके में अपनी खास पहचान बना ली है। उनकी किस्में ‘नागेंद्र भोग’ और ‘रामजसी’ तुड़ाई के बाद करीब 12 से 15 दिन तक ताजी बनी रहती हैं। ‘नागेंद्र भोग’ का एक फल लगभग 700–800 ग्राम तक का होता है, सामान्य आम से करीब चार गुना बड़ा और फुटबॉल की तुलना में लगभग दोगुना भारी।
लखनऊ समेत कई बागवानी संस्थानों की टीमें अब सिंह की नर्सरी में आकर इन किस्मों का अध्ययन कर रही हैं और उनके गुणों को दस्तावेजी रूप दे रही हैं। पिछले कुछ दिनों में सरकारी संस्थानों ने इन फलों के नमूने संकलित कर परीक्षण के लिए भेजे हैं ताकि इन्हें पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम (PPV&FR Act) के तहत ‘किसान द्वारा विकसित किस्म’ के रूप में दर्ज किया जा सके।
राम किशोर ने आठ साल पहले इन किस्मों पर प्रयोग शुरू किए थे। वे तकनीक सार्वजनिक नहीं कर रहे और कहते हैं कि यह उनकी मेहनत का नतीजा है। उनकी नर्सरी में दोनों किस्मों के पेड़ों की ऊँचाई लगभग 15 फुट तक रहती है, जिससे ये पारंपरिक बड़े पेड़ों की तुलना में कम जगह लेते हैं। एक पेड़ से एक सीजन में 100–150 किलोग्राम तक उपज मिल सकती है।
सिंह इन फलों की सीधे बिक्री नहीं करते; वे पौधे तैयार कर किसानों और बागवानों को बेचते हैं। मीडिया कवरेज के बाद अब तक लगभग 100 पौधे बिक चुके हैं, हर पौधे की कीमत करीब 300 रुपये रखी गई है। आर्थिक लाभ सीमित रहने के बावजूद पहचान और विशेषज्ञों का ध्यान मिलना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है।
आईसीएआर ने ‘रामजसी’ किस्म के पंजीकरण के लिए दस्तावेज भेज दिए हैं और ‘नागेंद्र भोग’ का भी मूल्यांकन चल रहा है। आईसीएआर के मुताबिक, अगर कोई किस्म व्यावसायिक स्तर पर फैलायी जाती है तो प्रयोग से मिलने वाले मुनाफे का 20% विकसितकर्ता को दिया जा सकता है।
रहुआ गांव में साधारण जीवन जीने वाले 50-वर्षीय राम किशोर ने अपने पिता और माँ के नाम पर दोनों किस्मों के नाम रखे हैं। वे कहते हैं कि सबसे बड़ी कमाई पैसे नहीं, बल्कि पहचान और उस विरासत का सम्मान है जो उनके परिवार के नाम से जुड़ेगी.

