सदर अस्पताल में टोकन सिस्टम फेल, घंटों लाइन में अपनी बारी का इंतजार कर रहे मरीज

रांची सदर अस्पताल में डिजिटल टोकन सिस्टम खराब होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। ओपीडी में लंबी कतारें लग रही हैं और लोग घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं।

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डिसप्ले पर दिखता रहता था टोकन नंबर, नहीं होती थी परेशानी

रांची: सदर अस्पताल में मरीजों की सहूलियत और लंबी लाइन से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से शुरू किया गया डिजिटल टोकन सिस्टम पिछले कुछ महीनों से पूरी तरह फेल हो गया है। इसके चलते अस्पताल की ओपीडी में इलाज कराने आ रहे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। व्यवस्था ध्वस्त होने के कारण मरीज घंटों लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर हैं।

मरीजों को राहत देने के उद्देश्य से की गई थी शुरुआत

अस्पताल में भीड़ को नियंत्रित करने और इलाज की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए टोकन सिस्टम लागू किया गया था। इस व्यवस्था के तहत मरीजों को पर्चा बनते ही एक टोकन नंबर दे दिया जाता था। डॉक्टर के कमरे के बाहर लगे डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर टोकन नंबर फ्लैश होता था, जिससे मरीज अपनी बारी आने पर ही डॉक्टर के पास जाते थे। इससे न केवल धक्का-मुक्की और बिना वजह की भीड़ से राहत मिलती थी, बल्कि मरीज आराम से बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर पाते थे।

हर दिन पहुंचते हैं 2000 मरीज

सदर अस्पताल की ओपीडी में रोजाना औसतन 2,000 मरीज इलाज और परामर्श के लिए आते हैं। ऐसे में टोकन और डिस्प्ले सिस्टम बंद होने से ओपीडी के बाहर फिर से अफरा-तफरी का माहौल बनने लगा है। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए घंटों कतार में खड़ा रहना बेहद कष्टदायक साबित हो रहा है। कई बार लाइन में आगे खड़े होने को लेकर मरीजों के बीच बहस की स्थिति भी बन जाती है।

मरीजों ने की सुधार की मांग

अस्पताल आए मरीजों का कहना है कि जब टोकन नंबर स्क्रीन पर दिखता था, तब कोई परेशानी नहीं होती थी। अब सिस्टम खराब होने से काफी समय बर्बाद हो रहा है। मरीजों और परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस तकनीकी खराबी को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए ताकि ओपीडी की व्यवस्था पुनः सुचारू हो सके।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।