2000 से लटका हुआ मुद्दा! जनजाति सुरक्षा मंच ने उठाई आवाज, बढ़ाईक-भुइयां-मुंडा समाज के 32000 बच्चो का भविष्य खतरे में

महुआडांड़ में जनजाति सुरक्षा मंच ने बढ़ाईक, भुइयां और मुंडा समुदाय के 32 हजार बच्चों के जाति प्रमाण पत्र का मुद्दा उठाया, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

Razi Ahmad
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Mahuadanr News : महुआडांड़ झारखंड के गठन के 25 साल बाद भी आदिवासी समाज के तीन समुदायों को आज तक न्याय नहीं मिला है। जनजाति सुरक्षा मंच, महुआडांड़ ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, नई दिल्ली को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।

मंच के अनुसार महुआडांड़ क्षेत्र के बढ़ाईक, भुइयां और मुंडा समुदाय को पीढ़ियों से अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है। 2000 में झारखंड राज्य बनने के बाद और 2016 में एसओपी जारी होने के बाद से इन तीनों जातियों का जाति प्रमाण पत्र बनना पूरी तरह बंद हो गया गया है।

32 हजार बच्चों का भविष्य दांव पर

मंच के जिला संयोजक बालेश्वर बढ़ाईक ने पत्र में लिखा है कि जाति प्रमाण पत्र नहीं बनने से इन तीनों समुदाय के लगभग 32,000 बेटा-बेटियों की पढ़ाई-लिखाई और नौकरी प्रभावित हो रही है। छात्रवृत्ति, सरकारी नौकरी और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से ये बच्चे वंचित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा हमारी संस्कृति, पूजा-पद्धति और सामाजिक व्यवस्था पूरी तरह एसटी समुदाय जैसी है। बावजूद इसके हम सरकारी कागजों में पिछड़ते जा रहे हैं।”

क्या है मांग?

जनजाति सुरक्षा मंच ने राष्ट्रीय आयोग से अनुरोध किया है कि तत्काल हस्तक्षेप कर बढ़ाईक-भुइयां-मुंडा समुदाय के लिए जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने की प्रक्रिया शुरू कराई जाए।

मंच ने कहा कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगाइस पत्र पर मंच के संयोजक बालेश्वर बढ़ाईक के साथ मनीष बढ़ाईक, नंदलाल मुंडा और पिंटू लोहरा के भी हस्ताक्षर हैं।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।