हिंदी पखवाड़ा पर विशेष : भारत से लेकर सात समंदर पार तक गूंज रही हिंदी, जानिए किन 10 देशों में बोलते हैं लोग हमारी भाषा

हिंदी अब सिर्फ भारत की भाषा नहीं रही। विश्व हिंदी सम्मेलनों, प्रवासी भारतीयों और सांस्कृतिक जुड़ाव के दम पर हिंदी दुनिया के कई देशों में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी है।

8 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

जंग बहादुर पांडेय

भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि किसी देश की पहचान, संस्कृति और आत्मा की अभिव्यक्ति भी होती है। भारत की राजभाषा हिंदी है। राजभाषा का अर्थ है वह भाषा, जिसमें शासन और प्रशासन का कामकाज संचालित होता है। इतिहास पर नजर डालें तो वैदिक काल में संस्कृत इस देश की राजभाषा रही, मुगल काल में फारसी और ब्रिटिश शासन के दौरान अंग्रेजी का प्रभुत्व रहा। स्वतंत्रता के बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान निर्माताओं ने हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया। इसके बाद 26 नवंबर 1949 को संविधान तैयार हुआ और 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ। तभी से हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। इसके साथ ही 14 से 21 सितंबर तक हिंदी सप्ताह और 14 से 30 सितंबर तक हिंदी पखवाड़ा आयोजित किया जाता है। यह हिंदी भाषा के सम्मान और उसके प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

विश्व हिंदी सम्मेलन ने बढ़ाया हिंदी का वैश्विक सम्मान

दुनिया भर में हिंदी को पहचान दिलाने के लिए अब तक 12 विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। इन सम्मेलनों ने हिंदी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई ऊंचाइयां दी हैं।

अब तक हुए विश्व हिंदी सम्मेलन

प्रथम सम्मेलन– 10 से 12 जनवरी 1975, नागपुर (भारत)

द्वितीय सम्मेलन– 28 से 30 अगस्त 1976, पोर्ट लुई (मॉरीशस)

तृतीय सम्मेलन– 28 से 30 अक्टूबर 1983, नई दिल्ली (भारत)

चतुर्थ सम्मेलन– 2 से 4 दिसंबर 1993, पोर्ट लुई (मॉरीशस)

पंचम सम्मेलन– 4 से 8 अप्रैल 1996, पोर्ट ऑफ स्पेन (त्रिनिदाद एवं टोबैगो)

षष्ठ सम्मेलन– 14 से 18 सितंबर 1999, लंदन (यूके)

सप्तम सम्मेलन– 6 से 9 जून 2003, पारामारिबो (सूरीनाम)

अष्टम सम्मेलन– 13 से 15 जुलाई 2007, न्यूयॉर्क (अमेरिका)

नवम सम्मेलन– 22 से 24 सितंबर 2012, जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका)

दशम सम्मेलन– 10 से 12 सितंबर 2015, भोपाल (भारत)

एकादश सम्मेलन– 18 से 20 अगस्त 2018, पोर्ट लुई (मॉरीशस)

द्वादश सम्मेलन– 15 से 17 फरवरी 2023, नादी (फीजी)

जर्मनी में भी दिखी हिंदी की लोकप्रियता

लेखक बताते हैं कि वर्ष 2013 में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर), नई दिल्ली के सौजन्य से उन्हें जर्मनी के जोहांस गुटेनबर्ग विश्वविद्यालय, माइंस में हिंदी अतिथि प्राध्यापक के रूप में अध्यापन का अवसर मिला था। वहां यह देखकर बेहद खुशी हुई कि हिंदी सीखने के लिए लगभग 50 छात्र-छात्राएं नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहते थे। भारत से बाहर इन 10 देशों में भी बोली जाती है हिंदी-

नेपाल

नेपाल और भारत के बीच सांस्कृतिक और भाषाई संबंध बेहद गहरे हैं। यही वजह है कि नेपाल में हिंदी व्यापक रूप से समझी और बोली जाती है। आम बातचीत से लेकर मनोरंजन तक, हिंदी वहां की जिंदगी का हिस्सा है।

मॉरीशस

मॉरीशस में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं। हिंदी वहां की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे विशेष सम्मान प्राप्त है। मॉरीशस में तीन विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हो चुके हैं-1976, 1993 और 2018 में। वर्ष 2018 में आयोजित एकादश विश्व हिंदी सम्मेलन में लेखक को झारखंड सरकार के प्रतिनिधि के रूप में शामिल होने का अवसर मिला था। इस सम्मेलन का उद्घाटन तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और मॉरीशस के प्रधानमंत्री अनिरुद्ध जगन्नाथ ने संयुक्त रूप से किया था।

फीजी

फीजी में हिंदी का एक विशेष रूप विकसित हुआ है, जिसे “फीजी हिंदी” कहा जाता है। इंडो-फीजी समुदाय अंग्रेजी के साथ-साथ इसका प्रयोग करता है। फीजी हिंदी में “बुला” का अर्थ होता है-स्वागत है, जबकि “बिनाका” का अर्थ है-धन्यवाद। लेखक को 12वें विश्व हिंदी सम्मेलन में भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में भाग लेने का अवसर भी मिला था। इस दौरान उन्होंने फीजी के हिंदी साहित्यकारों पर एक संस्मरणात्मक लेख भी लिखा।

त्रिनिदाद और टोबैगो

यहां भारतीय मूल के लोगों के बीच हिंदी, विशेषकर भोजपुरी, आज भी बोली जाती है। धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में इसका विशेष महत्व है।

सूरीनाम

सूरीनाम में भारतीय मूल के लोगों ने हिंदी को अपनी संस्कृति और पहचान से जोड़े रखा है। आज भी वहां हिंदी कई परिवारों में बोली जाती है।

गुयाना

गुयाना में हिंदी धार्मिक आयोजनों और पारंपरिक त्योहारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह वहां के भारतीय मूल के लोगों की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुए है।

दक्षिण अफ्रीका

दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय के बीच हिंदी का प्रयोग विशेष अवसरों, धार्मिक कार्यक्रमों और त्योहारों में किया जाता है। यह सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत बनाए रखने में मदद करती है।

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)

यूएई में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं। यहां हिंदी व्यापक रूप से समझी और बोली जाती है तथा भारतीय समुदाय के बीच संपर्क भाषा के रूप में काम करती है। लेखक को दुबई में तीन बार हिंदी सम्मेलनों में भाग लेने का अवसर मिला है। उनके पुत्र डॉ. मानस कुमार पाण्डेय दुबई की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका

अमेरिका में बसे भारतीय परिवारों और सांस्कृतिक संगठनों के बीच हिंदी का व्यापक उपयोग होता है। सामुदायिक कार्यक्रमों और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से नई पीढ़ी भी हिंदी से जुड़ी रहती है।

यूनाइटेड किंगडम

ब्रिटेन में भारतीय समुदाय हिंदी को सक्रिय रूप से उपयोग करता है। कई स्कूलों और भाषा केंद्रों में भी हिंदी पढ़ाई जाती है, जिससे युवा पीढ़ी में इसकी लोकप्रियता बनी हुई है।

हिंदी की बढ़ती वैश्विक पहचान

हिंदी की वैश्विक पहुंच इस बात का प्रमाण है कि यह भाषा भारत की सीमाओं से कहीं आगे निकल चुकी है। ऐतिहासिक रिश्तों, प्रवास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने हिंदी को दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज इन देशों में हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि संस्कृति, पहचान और भावनाओं का मजबूत माध्यम है।

हमें यह भाषा सूरदास, तुलसीदास, कबीर, जायसी, रहीम, भूषण, बिहारी, मैथिलीशरण गुप्त और रामधारी सिंह दिनकर जैसे महान साहित्यकारों की विरासत के रूप में मिली है। यही कारण है कि हिंदी पर हमें गर्व भी है और सम्मान भी।

कवि के शब्दों में-

बिहरौं बिहरी की बिहार वाटिका में,

चाहे सूर की कूटी में गढ़ आसन जमाइए।

देव की दरी पर बैठ दिव्यता निहारिए,

या भूषण की सेना के सिपाही बन जाइए।

केशव के काव्य में कलोल केलि कीजिए,

या तुलसी के मानस में डूबकी लगाइए।

और भाषा-भाषियों मिलेगा मनमाना सुख,

हिंदी के हिंडोले में जरा तो बैठ जाइए।

 

Share This Article
विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।