अमरावती: आंध्र प्रदेश पुलिस ने पाकिस्तान के लिए कथित तौर पर जासूसी करने के आरोप में एक नौसेना कर्मी समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है और मामले में 18 संदिग्धों में से ज्यादातर नौसेना से जुड़े हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि कुल 18 संदिग्धों में से 13 नौसेना कर्मी हैं, जो कथित तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नुकसानदेह जासूसी के मामले में शामिल थे।
आंध्र प्रदेश पुलिस विभाग द्वारा मंगलवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, पुलिस ने विशाखापत्तनम नौसैन्य अड्डे के कर्मचारी प्रदीप मुखर्जी और विशाखापत्तनम में नौसेना अधिकारियों के लिए अनुबंध पर चालक के तौर पर काम करने वाले अन्नम साई वरप्रसाद को गिरफ्तार किया है।
विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘आंध्र प्रदेश काउंटर इंटेलिजेंस सेल को विश्वसनीय सूचना मिली थी कि भारत में कुछ लोग कथित तौर पर पाकिस्तान के खुफिया एजेंट के सीधे संपर्क में हैं और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नुकसानदेह जासूसी की साजिश में शामिल होने का संदेह है।’’
इसमें कहा गया, ‘‘इस मामले में प्रथम दृष्टया भूमिका सामने आने के बाद दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है और बाकी संदिग्धों के संबंध में आगे की जांच जारी है।’’
मुखर्जी को हाल में तमिलनाडु के कोयंबटूर से गिरफ्तार किया गया था। उसे विजयवाड़ा की एक अदालत में पेश किया गया, जहां से 14 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वह फिलहाल विजयवाड़ा की जिला जेल में बंद हैं।
वरप्रसाद को भी 14 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और वह भी इसी जेल में बंद है।
काउंटर इंटेलिजेंस सेल ने 10 राज्यों के पुलिस बलों के साथ समन्वय कर उन संदिग्धों का पता लगाया, जो कथित तौर पर पाकिस्तान के खुफिया एजेंट के सीधे संपर्क में थे।
पुलिस के अनुसार, वरप्रसाद और मुखर्जी ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंट को संवेदनशील जानकारी साझा की थी।
सीआई सेल ने ‘‘ऑपरेशन फायरवॉल-2026’’ के तहत 10 राज्यों के साथ समन्वय कर रक्षा प्रतिष्ठानों और रणनीतिक स्थानों से जुड़ी संवेदनशील एवं गोपनीय जानकारी साझा करने के आरोपों की जांच की।
विज्ञप्ति में कहा गया कि संदिग्धों ने एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों के जरिए विशाखापत्तनम और देश के अन्य हिस्सों से जुड़ी जानकारी साझा की थी। पुलिस की खुफिया इकाई ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं और बाकी संदिग्धों के संबंध में जांच जारी है।


