दुर्गा पूजा के बाद अब दीपावली पर भी संकट के बादल, तीन माह से वेतन को तरस रहे आउटसोर्स कर्मचारी

झारखंड में हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। संघ ने मुख्यमंत्री से दीपावली से पहले बकाया भुगतान और अनुबंध प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की।

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रांची: झारखंड के विभिन्न सरकारी विभागों, जिला और क्षेत्रीय कार्यालयों में कार्यरत हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को पिछले तीन माह से वेतन नहीं मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। वेतन के अभाव में कर्मचारियों की दुर्गा पूजा बदहाली में गुजरी और अब दीपावली से पहले भी उनके परिवारों की खुशियों पर संकट मंडरा रहा है। इसको लेकर झारखंड राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर दीपावली से पूर्व लंबित वेतन का भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की है।

संघ का कहना है कि दुर्गा पूजा जैसे महत्वपूर्ण त्योहार पर भी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलना बेहद चिंताजनक है। जिन माता-पिता को अपने बच्चों के लिए नए कपड़े, मिठाइयां और खिलौने खरीदने थे, वे घर की बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए भी परेशान रहे। अब दीपावली नजदीक है, लेकिन वेतन नहीं मिलने के कारण हजारों परिवारों के सामने त्योहार मनाने का संकट खड़ा हो गया है।

संघ ने भावुक अपील करते हुए कहा कि दुर्गा पूजा तो कर्मचारियों ने किसी तरह आर्थिक तंगी में गुजार दी, लेकिन दीपावली पर उनके बच्चों की खुशियां प्रभावित नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री से आग्रह है कि समय रहते बकाया वेतन भुगतान का आदेश दिया जाए, ताकि कर्मचारियों के घरों में भी दीप जल सकें और उनके बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लौट सके।

अनुबंध प्रक्रिया में देरी का खामियाजा भुगत रहे कर्मचारी

संघ के अनुसार, JAP-IT द्वारा सूचीबद्ध एजेंसियों के साथ पूर्ववर्ती अनुबंध जुलाई 2026 में समाप्त हो गया था। इसके बाद अनुबंध विस्तार की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और झारखंड मैनपावर प्रोक्योरमेंट मैनुअल, 2025 के तहत नई संविदा को अंतिम रूप दिए जाने की स्थिति भी स्पष्ट नहीं हो सकी। संघ का आरोप है कि इस प्रशासनिक एवं संविदात्मक अनिश्चितता का खामियाजा उन कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है, जो सरकारी कार्यालयों में लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

कर्मचारी कंप्यूटर संचालन, डेटा प्रविष्टि, सरकारी अभिलेखों के संधारण, पत्राचार और अन्य कार्यालयी कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। सीमित मानदेय पर परिवार चलाने वाले इन कर्मचारियों के लिए तीन माह तक वेतन नहीं मिलना भोजन, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करने में बड़ी बाधा बन गया है।

संघ ने सवाल उठाया कि जब कर्मचारियों से लगातार काम लिया जा रहा है, तो उनके पारिश्रमिक के भुगतान की व्यवस्था समय पर क्यों नहीं की जा रही है? अनुबंध संबंधी प्रक्रिया में देरी का बोझ कर्मचारियों और उनके परिवारों पर डालना उचित नहीं है।

दीपावली से पहले वेतन भुगतान की मांग

झारखंड राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री एवं संबंधित विभागों से मांग की है कि अक्टूबर माह तक के लंबित वेतन का भुगतान दीपावली से पहले सुनिश्चित किया जाए। साथ ही JAP-IT और संबंधित एजेंसियों के बीच अनुबंध विस्तार अथवा नई संविदा की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए, ताकि भविष्य में अनुबंध समाप्त होने या एजेंसी बदलने की स्थिति में कर्मचारियों का वेतन बाधित न हो। संघ ने वेतन भुगतान में हो रही देरी की समीक्षा कर जवाबदेही तय करने की भी मांग की है। संघ का कहना है कि कर्मचारी किसी विशेष सुविधा या दया की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने परिश्रम के बदले मिलने वाले वेतन की मांग कर रहे हैं।

संघ ने मुख्यमंत्री से मार्मिक अपील करते हुए कहा कि सरकारी व्यवस्था में अनुबंध की प्रक्रिया लंबित हो सकती है, लेकिन किसी कर्मचारी के घर का चूल्हा, बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतें इंतजार नहीं कर सकतीं। दीपावली से पहले वेतन भुगतान सुनिश्चित करना हजारों परिवारों के लिए सबसे बड़ी राहत और त्योहार का सबसे अनमोल उपहार होगा।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।