रांची: केंद्र सरकार द्वारा संसद में पास किए गए खान एवं खनिज विकास और नियमन संशोधन विधेयक पर जारी सियासत के बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार और विपक्षी दलों पर जोरदार हमला बोला है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून केवल झारखंड के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए लागू होता है और इससे राज्यों के राजस्व में बढ़ोतरी होगी।
झामुमो द्वारा इस विधेयक के विरोध में दी जा रही आंदोलन की चेतावनी पर पलटवार करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि 13 अगस्त को जब संसद में एमएमडीआरए बिल पास हुआ, तब विपक्षी दलों ने बहस में भाग ही नहीं लिया। अगर वे चर्चा में शामिल होते तो उन्हें सही जानकारी मिलती।
उन्होंने बताया कि पहले इस कानून के तहत राज्यों को कुल राजस्व का 60.24 प्रतिशत मिलता था और केंद्र को 39.76 प्रतिशत जाता था। लेकिन नए प्रावधानों के तहत अब राज्यों की हिस्सेदारी बढ़कर 88.53 प्रतिशत हो गई है, जबकि केंद्र का हिस्सा घटकर महज 11.47 प्रतिशत रह गया है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मोदी सरकार हमेशा राज्यों के विकास के पक्ष में रही है और इसी का नतीजा है कि केंद्र से मिलने वाला अंश बढ़ा है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा झारखंड को अब तक 2 लाख 32 करोड़ रुपये की राशि दी जा चुकी है।
राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए बाबूलाल ने कहा कि वर्ष 2024 में नियम बनाने के बाद से हेमंत सरकार ने तीन बार सेस की दरें बढ़ाई हैं।
फिलहाल राज्य सरकार कोयले पर 450 रुपये प्रति टन और लौह अयस्क (आयरन ओर) पर 600 रुपये प्रति टन सेस वसूल रही है। यह पड़ोसी राज्यों ओडिशा और छत्तीसगढ़ की तुलना में काफी ज्यादा है, जिससे झारखंड के उद्योगों और छोटे उद्यमियों को नुकसान हो रहा है।
उन्होंने कहा कि बिना केंद्र की अनुमति के राज्य सरकारें मनमाना टैक्स नहीं लगा सकतीं, ताकि देश भर में करों की एकरूपता बनी रहे।
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार छात्र आंदोलन से जनता का ध्यान भटकाने और उसे दिशाहीन करने के लिए एमएमडीआर एक्ट का बहाना बनाकर आंदोलन की चेतावनी दे रही है।


