कैनरा बैंक परिसर में राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल को मिला जोरदार समर्थन

कैनरा बैंक रांची में राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल को जोरदार समर्थन, 250 से अधिक कर्मचारियों ने पीएलआई में समानता और पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था की मांग उठाई।

News Aroma
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रांची : कैनरा बैंक के परिसर में UFBU के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी एक दिवसीय बैंक हड़ताल का आयोजन किया गया। हड़ताल के दौरान बैंकिंग कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने अपनी लंबित मांगों और विशेष रूप से पीएलआई में भेदभाव तथा पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।

इस हड़ताल का नेतृत्व CBOA के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शैलेष त्रिपाठी एवं CBEU के शीर्ष नेता मनीष कुमार सिंह ने किया। उनके नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन में 250 से अधिक बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

हड़ताल में शामिल कर्मचारियों में PLI (Performance Linked Incentive) में किए गए कथित भेदभाव को लेकर भारी निराशा, असंतोष और आक्रोश देखने को मिला। कर्मचारियों का कहना है कि PLI की वर्तमान व्यवस्था में Scale-IV एवं उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए 365 दिनों के PLI की व्यवस्था की गई है, जबकि बड़ी संख्या में अन्य कर्मचारियों को केवल 15 दिनों के PLI तक सीमित रखा गया है। कर्मचारियों ने इसे समान कार्य एवं योगदान के बावजूद असमान व्यवहार बताते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की।

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने एकजुट होकर समान एवं न्यायसंगत PLI व्यवस्था की मांग उठाई। उनका स्पष्ट कहना था कि बैंक की सफलता में प्रत्येक कर्मचारी का योगदान महत्वपूर्ण है और इसलिए प्रोत्साहन की व्यवस्था भी न्यायपूर्ण, पारदर्शी एवं भेदभावरहित होनी चाहिए।

इसके साथ ही वर्ष 2024 से लंबित पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था को लागू करने की मांग को लेकर भी परिसर में जोरदार नारेबाजी की गई। कर्मचारियों ने सरकार से मांग की कि पाँच दिवसीय बैंकिंग की लंबे समय से लंबित मांग पर शीघ्र निर्णय लेते हुए इसे लागू किया जाए।

हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि बैंकिंग कर्मचारियों की जायज मांगों को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कर्मचारियों ने सरकार एवं संबंधित पक्षों से आग्रह किया कि PLI में व्याप्त असमानता को दूर करते हुए सभी वर्गों के कर्मचारियों के लिए न्यायसंगत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा पाँच दिवसीय बैंकिंग की मांग को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।

प्रदर्शन इस बात का स्पष्ट संकेत रहा कि बैंकिंग कर्मचारी अपने अधिकारों, सम्मान और न्यायपूर्ण सेवा शर्तों के लिए एकजुट हैं और अपनी मांगों के लिए लोकतांत्रिक एवं संगठित तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।

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