नयी दिल्ली: 14 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को ‘विमल इलायची’ बनाने वाली कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उत्पाद का प्रचार करने वाले कलाकारों को एफडीए द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस रद्द करने का अनुरोध किया गया था।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने विमल इलायची के ब्रांड एंबेसडर – शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ- को ये नोटिस विज्ञापनों में उत्पाद को गलत तरीके से पेश करने के आरोप में जारी किए थे।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि अधिकार क्षेत्र न होने के कारण यह याचिका सुनवाई के लायक नहीं है। उन्होंने उचित मंच के सिद्धांत के आधार पर कहा कि याचिकाकर्ता के लिए विवादित नोटिस से जुड़ी अपनी शिकायतें रखने के लिए महाराष्ट्र की अदालतें ज्यादा सही और सुविधाजनक जगह हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, “इसलिए, याचिकाकर्ता की चुनौती के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना, इस आधार पर याचिका खारिज की जाती है। यदि कोई लंबित आवेदन है, तो उसका भी निपटारा किया जाता है।”
याचिकाकर्ता पीबी एग्रो एलएलपी ने अपनी याचिका में कहा है कि वह ‘विमल’ ब्रांड के तहत इलायची उत्पाद के संवर्धन के लिए जाने-माने कलाकारों की सेवाएं लेती है और उनके साथ विज्ञापन करार करती है। कंपनी का कहना था कि उसका प्रचार अभियान लागू कानूनों का पूरी तरह से पालन करता है।
उसने कहा कि महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने नियामक नोटिस जारी किए थे। इन नोटिस में आरोप लगाया गया है कि ‘विमल इलायची’ के विज्ञापन असल में ‘विमल पान मसाला’ का अप्रत्यक्ष प्रचार हैं, जबकि महाराष्ट्र में इस उत्पाद पर प्रतिबंध है।
याचिका में कहा गया है कि महाराष्ट्र एफडीए ने विमल इलायची के विज्ञापनों में दिखने वाले अभिनेताओं को ऐसे दस्तावेज देने के लिए कहा है जिनसे यह साबित हो सके कि विमल इलायची, प्रतिबंधित किए गए पान मसाला उत्पादों से अलग है।
इसमें विज्ञापन को रोकने और डिजिटल मंचों से इससे जुड़ी सामग्री को हटाने की भी मांग की गई है।
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि 11 अगस्त का एफडीए का नोटिस केवल अभिनेताओं को भेजा गया था, न कि खुद कंपनी को, जबकि राज्य नियामक की किसी भी कार्रवाई से कंपनी को ही अपूरणीय क्षति होगी।
वकील ने कहा था कि याचिकाकर्ता को अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उसकी राय में याचिकाकर्ता यह साबित करने में नाकाम रहा है कि मामले का कोई भी अहम या जरूरी हिस्सा इस अदालत के अधिकार क्षेत्र के दायरे में आता है।
उसने कहा, “महाराष्ट्र में कथित गतिविधियों और कानूनी नियमों के उल्लंघन के संबंध में, एफएडीए मुंबई (महाराष्ट्र राज्य) ने याचिकाकर्ता द्वारा नियुक्त ब्रांड एंबेसडर (जो मुंबई के रहने वाले हैं) को यह कारण बताओ नोटिस जारी किया था।”
उसने कहा, “हालांकि याचिकाकर्ता ने दिल्ली में स्थित मंत्रालय और एफएसएसएआई को रिट याचिका में पक्षकार बनाया है, लेकिन न तो उनमें से किसी के खिलाफ कोई खास राहत मांगी गई है और न ही इन अधिकारियों द्वारा जारी किसी निर्देश या आदेश को अदालत में चुनौती दी गई है या रिट याचिका के साथ रिकॉर्ड पर रखा गया है।”
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता का दिल्ली से अपना कारोबार चलाना या दिल्ली से ब्रांड एंबेसडर रखना—खासकर तब जब याचिकाकर्ता को विवादित नोटिस जारी ही नहीं किया गया हो—उच्चतम न्यायालय और इस अदालत के पहले के फैसलों को देखते हुए, अकेले इस आधार पर इस अदालत को अधिकार क्षेत्र नहीं देता है।

