फ़ुटबॉल का खेल भी संगीत से कम नहीं

फीफा विश्वकप 2026 में अर्जेंटीना ने ऑस्ट्रिया को हराया, लियोनेल मेस्सी के शानदार प्रदर्शन, डमी मूवमेंट, काउंटर प्रेसिंग और रणनीतिक खेल से मैच में जीत दर्ज हुई रहा अद्भुत मुकाबला

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सुशोभित

संगीत में एक स्वर से दूसरे स्वर में जाने का बड़ा महत्व है। इसी आवाजाही से गायकी का स्थापत्य बनता है। कुछ स्वरों को हम कैसे छोड़ते हैं, इसकी भी बड़ी गुणचर्या है। मिसाल के तौर पर, साँझ का राग है शुद्ध कल्याण। इसके अवरोह में ‘तीव्र मध्यम’ स्वर निषिद्ध रहता है। लेकिन जब गायक शुद्ध कल्याण की बंदिश पेश करते हैं, तो वे न केवल अवरोह में स्वरों के बीच यात्रा करते हुए तीव्र मध्यम को छोड़ते हैं, बल्कि उसे, ‘छोड़ता हुआ’ बताते भी हैं। वे उसके निषेध को रेखांकित करते हैं और गुणी श्रोता इस पर दाद दिए बिना नहीं रहते।

चूँकि फ़ुटबॉल का खेल भी संगीत से कम नहीं, इसलिए उसमें भी गुणवान खिलाड़ी वह माना जाता है, जो गेंद के बिना भी अच्छा खेलता है। जिसका ‘विदाउट-द-बॉल’ मूवमेंट इतना सधा हुआ है कि उससे निर्मित होने वाले कोणों और परिप्रेक्ष्यों से गोल करने के नए अवसर उत्पन्न होते हैं। जैसे कि ‘डमी’, जिसमें गेंद को छोड़ा जाता है या ‘छोड़ता हुआ’ बताया जाता है। जब कोई फ़ॉरवर्ड स्वयं को गोल दाग़ने की बेहतर स्थिति में नहीं पाता या वह ऑफ़साइड होता है, तो वह अपनी तरफ़ ठेली गई गेंद को अपनी टीम के दूसरे फ़ॉरवर्ड के लिए छोड़ देता है। ऐन समय पर वह गेंद को अपने पैरों के नीचे से जाने देता है। इससे उसके पीछे दौड़े आ रहे फ़ॉरवर्ड के लिए ‘स्पेस’ क्रिएट होता है।

फ़ीफ़ा विश्वकप 2026 में ऑस्ट्रिया के विरुद्ध मैच में लियोनल मेस्सी ने जब अपना पहला गोल करके विश्वकप इतिहास में सर्वाधिक गोल करने का कीर्तिमान बनाया तो उस गोल का व्याकरण इसी तकनीक से निबद्ध था। इंटेंस मैन-मार्किंग से बचने के लिए मेस्सी फ़ॉर्मेशन के बाहर, हाशिये पर खेल रहे थे। 38वें मिनट में अर्जेन्तीना ने एक बेहतरीन फ़ॉरवर्ड मूव बनाया। मार्साई के लिए खेलने वाले फे़कुन्दो मेदीना ने पेनल्टी एरिया में आकर गेंद को कट-बैक किया। मिडफ़ील्ड से थियागो अल्मादा दौड़ते हुए आए। वे ख़ुद गोल दाग़ने की स्थिति में थे। ऑस्ट्रिया के सेंटर-बैक उन्हें टेकल करने के लिए आगे बढ़े। लेकिन ऐन लमहे में अल्मादा ने गेंद को बिना छुए उसे जाने दिया। तमाम डिफ़ेंडर्स वहीं ख़र्च हो गए। इससे निर्मित हुए ‘स्पेस’ में मेस्सी दौड़ते हुए आए और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उनके लेजेंडरी लेफ़्ट-फ़ुट ने गेंद को गोलचौकी में धकेल दिया। अर्जेन्तीना 1 : ऑस्ट्रिया 0… यही फ़ुटबॉल की ज्यामितीय सुन्दरता है।

लेकिन यह एक कठिन मैच था। ऑस्ट्रिया ‘लो-ब्लॉक’ में खेल रही थी (4-2-3-1 का बेहद डिफ़ेन्सिव फ़ॉर्मेशन) और उसने गोल की मज़बूत नाकेबंदी कर रही थी। यह कोई कमज़ोर टीम नहीं थी। रियल मैड्रिड के लिए खेलने वाले डेविड अलाबा और बोरुशिया डॉर्टमंड के लिए खेलने वाले मार्सेल सैबिट्ज़र जैसे नामचीन उनकी स्टार्टिंग-इलेवन में थे। उनके कोच महान राल्फ़ रान्गनिक हैं। ये मैनचेस्टर यूनाइटेड के भी कोच रह चुके हैं। 1980 के दशक में उन्होंने ‘काउंटर-प्रेसिंग’ की वह तकनीक ईजाद की थी, जिसे उसके बाद अनेक आधुनिक, विशेषकर जर्मन कोचेस ने अपनाया है। इसमें गेंद को हाथ से गँवाने के बाद प्रतिपक्षी खिलाड़ी डिफ़ेन्सिव ऑर्गेनाइज़ेशन बनाने के बजाय आक्रामक तरीक़े से ‘प्रेस’ करते हुए गेंद को फिर से छीनने की कोशिश करते हैं। इस सिस्टम में प्रतिपक्षी के लिए पज़ेशन रखना और गोल करना कठिन हो जाता है। तब रक्षापंक्ति को भेदने के लिए ‘डमी’ जैसी तकनीकें आज़माई जाती हैं। कहना ना होगा, वह विश्व-कीर्तिमान बनाने वाला गोल जितना मेस्सी का था, उससे कम एटलेटिको मैड्रिड के लिए स्पैनिश लीग खेलने वाले थियागो अल्मादा का नहीं था।

खेल के 90वें मिनट में लियोन्द्रो परीदेस (बोका जूनियर्स) ने गेंद को ‘इंटरसेप्ट’ किया और एक ‘काउंटर-अटैक’ की शुरुआत की। गेंद फिर मेस्सी के क़दमों तले थी, जिन्होंने एक ऊर्जस्वित रन लिया। उन्होंने अपने सेंटर फ़ॉरवर्ड हूलीयन अल्वारेज़ को पास दिया, जो गोल नहीं कर पाए, किंतु मेस्सी ने रिबाउंड पर गेंद को फिर हासिल किया और पाँच खिलाड़ियों को छकाते हुए एक और गोल दाग़ दिया। इसके लिए उन्होंने एक डिफ़ेंडर को ‘नटमेग’ भी किया, यानी उसके पैरों के बीच में से गोल पिरो दिया। यह केक पर चेरी की तरह था। 1-0 की जीत भी जीत होती है और 3 पॉइंट्स दिलाती है, लेकिन 2-0 की जीत स्वर्ण में सुगंध रच देती है, मुकुट में कलगी जड़ देती है। 17 गोलों के साथ भी विश्व-कीर्तिमान मेस्सी के पास था, 18 के साथ उसकी महत्ता थोड़ी और बढ़ गई।

इस विश्वकप में अर्जेन्तीना ने 5 गोल किए हैं और पाँचों मेस्सी के क़दमों से निकले हैं। अलबत्ता इन गोलों की ‘जेनेसिस’ हमें उनके पीछे निहित टीम-प्रयास और तालमेल को दिखाती है। ये लीग राउंड्स हैं, जैसे-जैसे खेल नॉकआउट मुक़ाबलों की ओर बढ़ेगा, मेस्सी की निगरानी और सख़्त होती जाएगी। तब हमें लॉतारो मार्तीनेज़, हूलीयन अल्वारेज़, एन्ज़ो फ़र्नान्दीज़, रोद्रीगो दी पॉल आदि के गोल भी यक़ीनन देखने को मिलेंगे। विश्वकप एक लम्बी दौड़ है और हमने शुरुआती क़दम सधे हुए उठाए हैं।
वामोस अर्ख़ेन्तीना, वीवा फ़ुतबोल!

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।