
Gumla News : सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को उजागर करने वाली खबर का असर एक बार फिर देखने को मिला। रायडीह प्रखंड के कोब्जा पंचायत अंतर्गत बुचीडाड़ी गांव में मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर प्रकाशित समाचार के बाद गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महतो स्वयं गांव पहुंचे और ग्रामीणों की समस्याओं का जायजा लिया।
दौरे के दौरान ग्रामीणों ने उपायुक्त को बताया कि आज भी गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं है। किसी के बीमार पड़ने या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की स्थिति में लोगों को मरीजों को खाट पर लादकर करीब पांच किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। मुख्य सड़क तक पहुंचने के बाद ही एंबुलेंस की सुविधा मिल पाती है। सड़क की कमी के कारण स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
ग्रामीणों ने बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू करने, आंगनबाड़ी केंद्र खोलने और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करने की मांग भी रखी। उन्होंने गलगुटरी गांव के वर्षों से बंद विद्यालय को पुनः संचालित करने के साथ-साथ आसपास के गांवों में बोरिंग कराने की आवश्यकता बताई।
पंचायत भवन में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने कहा कि प्रशासन गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बुचीडाड़ी तक सड़क निर्माण के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कर राज्य सरकार को भेजने का निर्देश दिया। साथ ही मनरेगा के तहत पहले रास्ते की मार्किंग कर उसे आवागमन योग्य बनाने और बाद में पक्की सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही।
उपायुक्त ने बुचीडाड़ी, नवाटोली, गलगुटरी और अवरालोंगरा गांवों में प्राथमिकता के आधार पर पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बोरिंग कराने का भी आश्वासन दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
ग्रामीणों की आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से उपायुक्त ने महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने और जोहार परियोजना के तहत मुर्गीपालन, बकरी पालन एवं सूकर पालन का प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की बात कही। वहीं किसानों के लिए तालाब निर्माण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की योजना पर भी जोर दिया गया।
इसके अलावा पंचायत प्रतिनिधियों और मुखिया को निर्देश दिया गया कि 15वें वित्त आयोग से प्राप्त राशि का उपयोग गांवों की प्राथमिक समस्याओं के समाधान में किया जाए, ताकि ग्रामीणों को जल्द से जल्द बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल सके।

