रांची : इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) झारखंड संयुक्त चिकित्सा आंदोलन के तत्वावधान में बुधवार को रिम्स और सदर अस्पताल में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों का जुटान देखने को मिला। राज्य भर के डॉक्टरों ने अपनी वर्षों पुरानी जायज मांगों के समर्थन में एकजुटता प्रदर्शित की। RIMS में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ चिकित्सकों, जूनियर डॉक्टरों, सरकारी एवं निजी अस्पतालों के चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मचारी संघों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में चिकित्सकों की सुरक्षा, सम्मान और झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

प्रदर्शन और प्रेस कॉन्फ्रेंस के उपरांत चिकित्सकों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने RIMS निदेशक कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। इसमें सरकार और प्रबंधन से संबंधित मांगों पर त्वरित व समयबद्ध कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है। रिम्स के साथ-साथ सदर अस्पताल में भी चिकित्सकों की मजबूत भागीदारी दर्ज की गई।
10 सूत्रीय ‘कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ की प्रमुख मांगें
चिकित्सकों एवं महिला डॉक्टरों की सुरक्षा : कार्यस्थल पर डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट’ का प्रभावी क्रियान्वयन।
DACP लागू करना : केंद्र सरकार और बिहार राज्य की तर्ज पर मेडिकल, विशेषज्ञ तथा दंत चिकित्सकों के लिए ‘डायनामिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन’ (DACP) लागू करना।
क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन : अधिनियम में व्यावहारिक बदलाव कर छोटे अस्पतालों व क्लिनिकों के लिए सुलभ नियामक प्रणाली बनाना।
सिंगल-विंडो सिस्टम : लाइसेंस, पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रियाओं को सरल एवं पारदर्शी बनाने के लिए एकल खिड़की व्यवस्था।
आयुष्मान भारत एवं अन्य मुद्दे : आयुष्मान योजना के तहत बकाया भुगतानों का समाधान, जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों के स्टाइपेंड व करियर से जुड़े मसलों का निराकरण और सरकार-चिकित्सक के बीच नियमित संवाद हेतु एक ‘संयुक्त निगरानी तंत्र’ का गठन।
आंदोलन मरीजों के खिलाफ नहीं
चिकित्सा संघों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह आंदोलन किसी भी रूप में आम जनता या मरीजों के विरुद्ध नहीं है। चिकित्सक अपनी नैतिक जिम्मेदारी और मरीजों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। इसी कारण आंदोलन के दौरान भी आपातकालीन और जीवनरक्षक चिकित्सा सेवाएं निर्बाध रूप से चालू रखी जा रही हैं।
21 अक्टूबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन, 22 से कार्य बहिष्कार
डॉक्टर ने राज्य सरकार से अपील की है कि वे समय रहते डॉक्टरों की समस्याओं पर सकारात्मक वार्ता शुरू करें। आंदोलन के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, यदि सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होती है, तो 21 अक्टूबर को पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बावजूद मांगें पूरी न होने की स्थिति में 22 अक्टूबर से पूरे झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं का पूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा।
कार्यक्रम में IMA झारखंड के सचिव डॉ. प्रदीप सिंह, HBI स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. अभिषेक रामाधीन, डॉ. शंभू सिंह, IMA वुमेन्स विंग की डॉ. ब्यूटी बनर्जी व डॉ. तनुश्री, झासा के डॉ. अजीत व डॉ. स्टीफन, JDA प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विकास, FAIMA के डॉ. जयदीप, MSN अध्यक्ष डॉ. आदित्य, JDN के डॉ. जितेंद्र और झारखंड स्वास्थ्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष आदिल समेत सैकड़ों डॉक्टर व कर्मचारी उपस्थित रहे।


