झारखंड के दोहरे हत्याकांड में 45 साल चले मुकदमे को न्यायालय ने न्यायिक व्यवस्था की विफलता बताया

Archana Ekka
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नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने झारखंड के एक दोहरे हत्याकांड में लगभग आधी सदी तक चले मुकदमे को “न्यायिक व्यवस्था की विफलता” बताते हुए 70 वर्षीय व्यक्ति की सजा निलंबित करके उसे रिहा करने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने आरोपी साइमन सोरेन की ओर से दायर अपील पर फैसला सुनाने में झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा दो दशक से अधिक समय लिये जाने पर भी सवाल उठाया। सोरेन का हिरासत में रहते हुए अस्पताल में उपचार जारी है।

पीठ ने 19 अगस्त के अपने आदेश में कहा, ‘‘यह मामला न्यायिक व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है, क्योंकि एक अपराध की सजा नहीं हो सकी और आरोपियों को 22 साल तक चली लंबी सुनवाई की पीड़ा झेलनी पड़ी। इसके बाद दोषसिद्धि हुई और अपील पर फैसला आने में दो दशक और दो साल लग गए।’’दुमका में 1981 में दो लोगों की हत्या की घटना हुई थी। इस मामले में छह लोगों को आरोपी बनाया गया था।न्यायालय ने कहा कि छह आरोपियों में से दो की आरोप तय होने से पहले ही मौत हो  गई, जबकि दोषी ठहराए गए चार में से तीन की उच्च न्यायालय में अपील लंबित रहने के दौरान मौत हो गई।

पीठ ने कहा, ‘‘एकमात्र जीवित आरोपी को उच्च न्यायालय द्वारा 2024 में दोषी ठहराए जाने के बाद हिरासत में आत्मसमर्पण करना पड़ा, उसकी उम्र करीब 70 वर्ष है और वह कई बीमारियों से पीड़ित है।’’ न्यायालय ने कहा कि साइमन सोरेन ने कुल मिलाकर केवल दो साल, चार महीने और 12 दिन हिरासत में बिताए हैं और इस तरह अपराध की सजा नहीं हो सकी।
साइमन सोरेन की ओर से पेश अधिवक्ता फौजिया शकील ने दलील दी कि यदि उसे जमानत नहीं दी गई, तो उसे गंभीर नुकसान और अपूरणीय क्षति होगी। पीठ ने कहा, ‘‘दोहरे हत्याकांड जैसे जघन्य अपराध के बावजूद हम पिछले 45 वर्षों में आरोपी द्वारा झेली गई पीड़ा से आंखें नहीं मूंद सकते। खासकर उसकी चिकित्सकीय स्थिति और राज्य के इस हलफनामे को देखते हुए कि याचिकाकर्ता हिरासत में रहते हुए अस्पताल में भर्ती है, हम सजा निलंबित करते हैं और निर्देश देते हैं कि उसे तत्काल रिहा किया जाए। शर्त यह होगी कि जमानत पर रहते हुए वह कोई अपराध नहीं करेगा और अपनी निजी जमानत देगा।’’
पीठ ने मामले के मूल रिकॉर्ड को भौतिक और डिजिटल दोनों रूपों में तलब किया तथा उच्च न्यायालय और निचली अदालत से इन्हें चार सप्ताह के भीतर भेजने को कहा।

पीठ ने कहा, ‘‘हमने अपने पहले के आदेश में उच्च न्यायालय को यह बताने वाली विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था कि सुनवाई और आपराधिक अपील के निपटारे में इतनी देरी क्यों हुई। उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल ने हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें फौजदारी अपीलों के लंबित मामलों की चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है।’’ पीठ ने कहा कि रजिस्ट्रार जनरल के अनुसार सुनवाई में देरी की वजह छह साल तक आरोपियों का फरार रहना था। उसने कहा कि हालांकि, 1991 में आरोप तय होने के बाद सुनवाई पूरी होने में लगे 12 साल की कोई वजह नहीं बताई गई है। पीठ ने कहा, ‘‘हमने जिला एवं सत्र न्यायाधीश की रिपोर्ट से यह भी पाया कि आरोप तय होने के बाद 11 वर्षों में यह मामला पांच बार एक अदालत से दूसरी अदालत में स्थानांतरित किया गया।’’

पीठ ने मामले को 18 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए कहा कि वह उच्च न्यायालय की रिपोर्ट में बताई गई आपराधिक अपीलों के लंबित रहने की स्थिति को लेकर चिंतित है। पीठ ने केंद्र सरकार को मामले में पक्षकार बनाने को कहा और उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा दाखिल हलफनामे की प्रति अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी या सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को देने का निर्देश दिया। उच्च न्यायालय ने 28 अक्टूबर 2024 को अपील खारिज कर दी थी और 2002 में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। अठारह अक्टूबर 1981 को बिभूति मंडल, बनारसी मंडल, क्षीर सागर मंडल और उसके रिश्तेदार जगदीश मंडल एवं सत्यनारायण मंडल धान की कटाई के लिए दुमका जिले के भुरुंडिया गांव गए थे।

मामले में सूचना देने वाले बने जगदीश और सत्यनारायण के अनुसार, नदी के पास पहुंचने पर संथाल आदिवासी एकत्रित हुए और वे धनुष-बाण और कुल्हाड़ियों से लैस थे और मंडल परिवार के सदस्यों को मारने का आह्वान कर रहे थे। इसके अनुसार मंडल परिवार के सदस्यों ने भागने की कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने उनका पीछा किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, जेठून सोरेन ने बिभूति मंडल पर तीर चलाया और इसके बाद साइमन सोरेन ने भी उस पर तीर चलाया। जेठून सोरेन और साइमन सोरेन ने बनारसी मंडल पर भी तीर चलाए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोनों के गिर जाने के बाद जगदीश और सत्यनारायण ने कुछ दूरी से देखा कि आरोपियों ने उन्हें काटकर मार डाला।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सन्मार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।