
रांची: झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा जनहित याचिकाओं पर दिए गए कड़े निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने प्रदेश में स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। झारखंड सरकार के मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने राज्य के सभी जिलों में ब्लड डोनेशन अवेयरनेस एंड मॉनिटरिंग कमेटी यानी जिला स्तरीय ‘रक्तदान जागरूकता और निगरानी समिति’ का अविलंब गठन करने का आदेश जारी कर दिया है। सरकार का यह फैसला राज्य की रक्त आपूर्ति प्रणाली को पूरी तरह संस्थागत रूप देने और स्वैच्छिक रक्तदान के जरिए 100% रक्त संग्रहण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
मुख्य सचिव द्वारा जारी पत्र के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के मुताबिक किसी भी जिले की वार्षिक रक्त आवश्यकता उसकी कुल आबादी का लगभग 1 प्रतिशत होती है। आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान राज्य भर में कुल 3,68,345 यूनिट रक्त का संग्रहण किया गया था, जिसमें से 3,798 स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों के माध्यम से केवल 1,27,035 यूनिट रक्त ही एकत्र हो पाया। इस डेटा के विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि राज्य के विभिन्न जिलों में रक्त संग्रहण और शिविरों के आयोजन को लेकर काफी असमानता है। इसी विसंगति को दूर करने और एक सुव्यवस्थित कार्यप्रणाली लागू करने के लिए अब जिला स्तर पर इस मजबूत समिति का खाका तैयार किया गया है।
इस नई व्यवस्था के तहत जिला स्तर पर बनने वाली समिति की कमान सीधे उपायुक्त के हाथों में होगी, जो इसके अध्यक्ष बनाए गए हैं। वहीं उप-विकास आयुक्त इसके उपाध्यक्ष और जिले के सिविल सर्जन इसके सचिव के रूप में काम करेंगे। समिति में प्रशासनिक और सामाजिक तालमेल बिठाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या पुलिस अधीक्षक, झारखंड सशस्त्र पुलिस के समादेष्टा, प्रमंडल वन अधिकारी, सरकारी व निजी रक्त केंद्रों के चिकित्सा पदाधिकारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। सरकार ने यह भी अनिवार्य कर दिया है कि इस समिति की समीक्षा बैठक प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में आयोजित की जाएगी।
यह समिति मुख्य रूप से राज्य में थैलेसीमिया, सिकल सेल और ब्लड ट्रांसफ्यूजन पर निर्भर रहने वाले गंभीर मरीजों के लिए बिना किसी रुकावट के रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। इसके अलावा खून की शुद्धता और सुरक्षा से कोई समझौता न हो, इसके लिए ‘ट्रांसफ्यूजन ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन’ के 5 प्रमुख मानकों यानी एचआईवी, मलेरिया, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी और सिफलिस की अनिवार्य जांच सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी इसी समिति की होगी। समिति जिले स्तर पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों का एक वार्षिक और मासिक कैलेंडर तैयार करेगी ताकि समाज में जागरूकता फैलाई जा सके। साथ ही, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ‘eRaktKosh’ पोर्टल पर रक्त संग्रहण, स्टॉक और अन्य आंकड़ों को समय पर और नियमित रूप से अपडेट किया जाएगा।

