
रांची : झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि झारखंड विधानसभा में संख्या बल स्पष्ट होने के बावजूद विपक्षी दल उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। पार्टी ने जानकारी देते हुए कहा कि षष्ठम् झारखंड विधानसभा चुनाव में गठबंधन के तहत झारखंड मुक्ति मोर्चा के 34, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल के 4 और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के 2 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इस तरह गठबंधन के कुल 56 विधायक हैं। इसके बाद सभी दलों ने सर्वसम्मति से हेमंत सोरेन को संयुक्त विधायक दल का नेता चुना था और बाद में राज्यपाल ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई थी।
पार्टी ने कहा कि झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं और राज्य से 6 राज्यसभा सदस्य चुने जाते हैं। हर दो साल में एक-तिहाई सीटों पर चुनाव होता है। पार्टी के मुताबिक राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 28 प्रथम वरीयता वोट जरूरी होते हैं। ऐसे में 56 विधायकों के समर्थन से गठबंधन के दो उम्मीदवारों की जीत तय मानी जा रही है।
इसी बीच भारतीय जनता पार्टी की ओर से राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारने की घोषणा के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि भाजपा के पास विधानसभा में केवल 21 विधायक हैं, इसके बावजूद उम्मीदवार उतारने की बात कही जा रही है। इसको लेकर आशंका जताई गई है कि विधायकों पर आर्थिक प्रलोभन, बाहरी दबाव या भयादोहन की कोशिश हो सकती है।
पार्टी ने मांग की है कि राज्यसभा चुनाव निष्पक्ष और भयमुक्त माहौल में कराया जाए। इसके लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, राजस्व खुफिया निदेशालय, केंद्रीय सतर्कता आयोग और राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सतर्क रहने का निर्देश देने की अपील की गई है।

