
Sand Scam: झारखंड में बालू नीलामी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि जिन स्टॉक यार्ड में बालू दिखाकर टेंडर जारी किया गया है, वहां जमीन पर वास्तविक रूप से बालू मौजूद ही नहीं है।
झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (जेएसएमडीसी) की ओर से दावा किया गया है कि संताल परगना के दुमका, देवघर, जामताड़ा और गोड्डा जिलों के स्टॉक यार्ड में 13 लाख सीएफटी से अधिक बालू उपलब्ध है। इसी आधार पर 19 मई को टेंडर जारी किया गया और 5 जून 2026 को नीलामी प्रस्तावित है।
हालांकि, स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल में कई स्टॉक यार्ड खाली पाए जाने की बात सामने आई है। कुछ जगहों पर नाममात्र बालू ही मौजूद बताया गया, जिससे सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर उजागर हुआ है।
देवघर के सारठ और अन्य क्षेत्रों में भी रिकॉर्ड में लाखों सीएफटी बालू दर्ज होने के बावजूद मौके पर पर्याप्त स्टॉक नहीं मिलने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
इधर, सवाल यह भी उठ रहा है कि जब 15 अगस्त 2025 के बाद निगम का घाटों से बालू उठाव का अधिकार समाप्त हो चुका है, तो इतना बड़ा स्टॉक आखिर तैयार कैसे हुआ।
बालू कारोबार से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता पर संदेह है, जबकि यह भी आशंका जताई जा रही है कि रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर बड़े स्तर पर अनियमितता की ओर इशारा करता है।
वहीं, जेएसएमडीसी के अधिकारियों का कहना है कि अगस्त 2025 तक उठाए गए बालू को स्टॉक यार्ड में रखा गया था और उसी की नीलामी की जा रही है। उनका यह भी कहना है कि पूरी प्रक्रिया सरकार की अनुमति के तहत और पारदर्शी तरीके से हो रही है।
अब इस मामले पर सभी की नजर 5 जून को होने वाली नीलामी और सरकार की संभावित जांच पर टिकी है।

